पश्चिमी सिंहभूम, 14 मई।
गुवा स्थित स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (सेल) की लौह अयस्क खदान में 11 मई से जारी अनिश्चितकालीन चक्का जाम आंदोलन बुधवार देर रात समाप्त हो गया। करीब 72 घंटे तक चले इस आंदोलन के चलते खदान क्षेत्र में लौह अयस्क का उत्पादन और परिवहन पूरी तरह बाधित रहा।
यह आंदोलन खदान प्रभावित 19 गांवों के ग्रामीणों, मुंडा-मानकी संघ तथा स्थानीय युवाओं द्वारा संचालित किया जा रहा था, जिसे झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा का समर्थन प्राप्त था।
बुधवार शाम 7 बजे से रात 11 बजे तक प्रशासन, सेल प्रबंधन और आंदोलनकारियों के बीच त्रिपक्षीय वार्ता हुई। लंबी बातचीत के बाद सभी पक्षों में सहमति बनने पर आंदोलन समाप्त करने का निर्णय लिया गया। प्रदर्शनकारी स्थानीय बेरोजगार युवाओं को रोजगार देने, विस्थापित परिवारों को नौकरी में प्राथमिकता देने और क्षेत्रीय समस्याओं के समाधान की मांग कर रहे थे। ग्रामीणों का कहना था कि सारंडा क्षेत्र से बड़े पैमाने पर लौह अयस्क का खनन हो रहा है, लेकिन स्थानीय युवाओं को रोजगार के अवसर नहीं मिल रहे।
समझौते के तहत 19 गांवों के मानकी और मुंडा ग्राम सभाओं के माध्यम से शिक्षित एवं दक्ष बेरोजगार युवाओं की सूची तैयार करेंगे, जिसे गुवा थाना प्रभारी को सौंपा जाएगा। इसके बाद पुलिस प्रशासन शैक्षणिक प्रमाणपत्रों, आपराधिक रिकॉर्ड एवं अन्य आवश्यक जांच पूरी करेगा। जांच के बाद आवश्यकता अनुसार युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराया जाएगा। यह भी तय हुआ कि भर्ती प्रक्रिया में केवल उन्हीं 19 गांवों के युवाओं को प्राथमिकता दी जाएगी और बाहरी व्यक्तियों को शामिल नहीं किया जाएगा।
वार्ता में सेल प्रबंधन की ओर से सीजीएम माइंस चंद्रभूषण कुमार, सीजीएम एचआर धीरेन्द्र मिश्रा, महाप्रबंधक डॉ. टी.सी. आनंद, प्रवीण कुमार सिंह एवं अनिल कुमार उपस्थित रहे। प्रशासन की ओर से जगन्नाथपुर एसडीओ महेंद्र छोटन उरांव, किरीबुरू एसडीपीओ अजय केरकेट्टा, अंचलाधिकारी मनोज कुमार, बीडीओ पप्पू रजक तथा विभिन्न थाना प्रभारी मौजूद रहे।
आंदोलनकारियों की ओर से पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा, मानकी, मुंडा एवं कई जनप्रतिनिधि तथा ग्रामीण प्रतिनिधि वार्ता में शामिल हुए। आंदोलन समाप्त होने के बाद देर रात से खदान क्षेत्र में लौह अयस्क उत्पादन और परिवहन व्यवस्था को पुनः सामान्य करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई।















