रायपुर, 02 अप्रैल।
रायपुर के वल्लभभाई पटेल अंतरराष्ट्रीय हॉकी स्टेडियम में खेले गए फाइनल मुकाबलों में ओडिशा की टीमों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए पुरुष और महिला दोनों वर्गों में स्वर्ण पदक अपने नाम किए। पुरुष वर्ग के फाइनल में ओडिशा ने झारखंड को 4-1 से पराजित किया, जबकि महिला वर्ग में मिजोरम के खिलाफ कड़े मुकाबले में 1-0 से जीत दर्ज की।
पुरुष वर्ग में झारखंड को रजत और छत्तीसगढ़ को कांस्य पदक मिला, वहीं महिला वर्ग में झारखंड ने कांस्य हासिल कर अपना स्थान सुनिश्चित किया। इन परिणामों ने यह स्पष्ट कर दिया कि जनजातीय क्षेत्रों में हॉकी की गहराई और प्रतिभा लगातार उभर रही है।
यह उपलब्धि केवल पदकों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह दर्शाती है कि ओडिशा, झारखंड और छत्तीसगढ़ के ग्रामीण और जनजातीय इलाकों में हॉकी जीवन का अभिन्न हिस्सा बन चुकी है। इन क्षेत्रों में बच्चे साधारण साधनों से खेलते हुए अपनी प्रतिभा को निखारते रहे हैं, जहां कभी संसाधनों की कमी थी, वहीं अब अवसरों का विस्तार हो रहा है।
पूर्वोत्तर राज्यों की भागीदारी भी उल्लेखनीय रही, जहां मिजोरम की टीम ने फाइनल तक पहुंचकर अपनी क्षमता का प्रदर्शन किया। यह संकेत है कि देश के विभिन्न हिस्सों में हॉकी के प्रति उत्साह और प्रतिभा व्यापक स्तर पर मौजूद है।
केंद्रीय स्तर पर खेल संरचना और राज्यों में विकसित हो रहे उत्कृष्टता केंद्रों के कारण अब खेल का वातावरण मजबूत हुआ है। बेहतर प्रशिक्षण, आधारभूत सुविधाएं और संगठित प्रयासों ने खिलाड़ियों को नई दिशा दी है। इससे जमीनी स्तर से लेकर उच्च स्तर तक एक सुदृढ़ प्रणाली विकसित हो रही है।
पूर्व ओलंपियन खिलाड़ियों और प्रशिक्षकों का मानना है कि जब स्थानीय खिलाड़ी प्रशिक्षण लेकर आगे बढ़ते हैं, तो वे दूसरों के लिए प्रेरणा बनते हैं। इससे लगातार नई प्रतिभाएं सामने आ रही हैं और खेल का विस्तार हो रहा है।
जनजातीय समाज में हॉकी लंबे समय से संस्कृति का हिस्सा रही है। यहां के युवा स्वाभाविक रूप से इस खेल से जुड़े रहते हैं, जिससे उनकी पकड़ मजबूत होती है। अब खेलो इंडिया जैसे मंचों के माध्यम से उन्हें सही दिशा और अवसर मिल रहे हैं।
बेहतर सुविधाओं और प्रशिक्षण के चलते खिलाड़ियों का आत्मविश्वास बढ़ा है और वे राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना रहे हैं। अब ये खिलाड़ी केवल भागीदारी तक सीमित नहीं हैं, बल्कि प्रतियोगिताओं में विजेता बनकर उभर रहे हैं।
रायपुर में ओडिशा की यह सफलता एक बड़े बदलाव का संकेत है, जहां गांवों से निकलकर खिलाड़ी राष्ट्रीय मंच पर अपनी पहचान बना रहे हैं। यह यात्रा न केवल खेल के क्षेत्र में बल्कि सामाजिक बदलाव का भी प्रतीक बन रही है।












