कल्याणी, 26 मई।
पश्चिम बंगाल की राजनीति में उस समय नया मोड़ आ गया जब तृणमूल कांग्रेस की वरिष्ठ सांसद ने मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में आयोजित एक प्रशासनिक बैठक में भागीदारी की। हाल के दिनों में पार्टी के भीतर अपनी नाराजगी सार्वजनिक करने और सांगठनिक पद से इस्तीफा देने के बाद, सांसद काकली घोष दस्तीदार की इस उपस्थिति को राजनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
कल्याणी स्थित एक प्रेक्षागृह में आयोजित इस उच्च-स्तरीय बैठक में उत्तर 24 परगना, नदिया और हुगली जिलों के शीर्ष प्रशासनिक अधिकारियों के साथ-साथ कई अन्य जनप्रतिनिधि भी उपस्थित रहे। इनमें देगंगा से हाल ही में निर्वाचित विधायक की मौजूदगी भी चर्चा का विषय बनी रही।
इस घटनाक्रम के पीछे की पृष्ठभूमि स्पष्ट करते हुए सूत्रों ने बताया कि नई सरकार के गठन के बाद मुख्यमंत्री ने घोषणा की थी कि प्रशासनिक बैठकों में दलीय सीमाओं से ऊपर उठकर जनप्रतिनिधियों को आमंत्रित किया जाएगा। इसी नीति के तहत विपक्षी दलों और पार्टी के अन्य प्रतिनिधियों को बैठक में बुलाया गया था।
हालांकि, राजनीतिक पर्यवेक्षक इसे एक व्यापक संदर्भ में देख रहे हैं। पिछले कुछ समय से सांसद पार्टी नेतृत्व के फैसलों से असंतुष्ट बताई जा रही थीं। उन्हें तृणमूल संसदीय दल के मुख्य सचेतक पद से हटाए जाने और बाद में बारासात संगठनात्मक जिला अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने के उनके निर्णय को पार्टी के भीतर बढ़ती दूरियों के संकेत के रूप में देखा गया था।
बैठक में शामिल होने के कारणों और अपने भविष्य के राजनीतिक रुख पर सवाल पूछे जाने पर सांसद ने बेहद संक्षिप्त प्रतिक्रिया देते हुए कहा, "प्रशासन सबका है।" उनकी इस टिप्पणी ने राजनीतिक पंडितों के बीच कई तरह की अटकलों को जन्म दे दिया है कि क्या यह महज एक आधिकारिक बैठक थी या इसके पीछे कोई बड़ा राजनीतिक संदेश छिपा है।















