पटना, 26 मई।
राज्य में लंबित राजस्व मामलों को लेकर सरकार ने कड़ा रुख अपनाते हुए राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के मंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि 15 दिनों के भीतर सभी मामलों का निपटारा अनिवार्य रूप से किया जाए, अन्यथा संबंधित राजस्व अधिकारियों पर कार्रवाई तय मानी जाएगी।
दाखिल-खारिज, परिमार्जन, ई-मापी, अभियान बसेरा और जन शिकायतों से जुड़े मामलों की विस्तृत समीक्षा करते हुए मंत्री ने कहा कि अब किसी भी स्तर पर ढिलाई स्वीकार नहीं की जाएगी।
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित जिलावार समीक्षा बैठक में पश्चिमी चंपारण, वैशाली और सहरसा जिलों के राजस्व कार्यों की प्रगति का आकलन किया गया, जिसमें कई मामलों में धीमी गति पर असंतोष व्यक्त किया गया।
बैठक के दौरान लंबित आवेदनों की स्थिति और कार्य निष्पादन में देरी को लेकर मंत्री ने नाराजगी जताते हुए कहा कि जनता को बार-बार राजस्व कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने दिए जा सकते।
समीक्षा में यह भी सामने आया कि कई दाखिल-खारिज मामलों को डिफेक्ट बताकर लंबित रखा जा रहा है, लेकिन आवेदकों को कमी की स्पष्ट जानकारी नहीं दी जा रही, जिस पर कड़ी आपत्ति जताई गई।
मंत्री ने निर्देश दिया कि प्रत्येक आवेदन में कमियों का स्पष्ट उल्लेख किया जाए ताकि आम लोगों को अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े।
उन्होंने यह भी कहा कि हाल के दिनों में हड़ताल और अन्य कारणों से राजस्व कार्य प्रभावित हुए हैं, लेकिन अब सभी अधिकारियों को सुबह से देर रात तक और आवश्यकता पड़ने पर सप्ताह के सभी दिनों में कार्य कर लंबित मामलों का निपटारा करना होगा।
बैठक में विभागीय सचिव ने अंचलाधिकारियों से दाखिल-खारिज, ई-मापी, परिमार्जन, सरकारी जमीन सत्यापन, राजस्व महाअभियान, किसान पंजीकरण सहित विभिन्न स्तरों पर लंबित मामलों की बारीकी से समीक्षा की।
इस बैठक में संबंधित जिलों के जिलाधिकारी, जनप्रतिनिधि और विभागीय वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे।















