नई दिल्ली, 25 मई ।
इबोला वायरस के संभावित खतरे को देखते हुए केंद्र सरकार सतर्क मोड में आ गई है। सोमवार को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने स्वास्थ्य मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक कर देशभर में तैयारियों की समीक्षा की। बैठक में इबोला की रोकथाम, निगरानी और सतर्कता व्यवस्था को और मजबूत करने पर जोर दिया गया।
स्वास्थ्य मंत्री ने सभी हवाई अड्डों, बंदरगाहों और सीमाई प्रवेश बिंदुओं पर स्क्रीनिंग व्यवस्था को पूरी तरह मजबूत और सक्रिय बनाए रखने के निर्देश दिए। साथ ही निगरानी तंत्र को तेज करने और संभावित संक्रमण की स्थिति में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने पर बल दिया गया।
बैठक में भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद और राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र को ट्रैकिंग, जांच और निगरानी से जुड़ी सभी व्यवस्थाएं हर समय तैयार रखने के निर्देश दिए गए। इसके अलावा स्वास्थ्य सचिव ने विभिन्न मंत्रालयों और संबंधित एजेंसियों के अधिकारियों के साथ संयुक्त समीक्षा बैठक कर समन्वय व्यवस्था की समीक्षा की।
स्वास्थ्य मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि देश में अब तक इबोला संक्रमण का कोई मामला सामने नहीं आया है, लेकिन एहतियात के तौर पर सभी जरूरी व्यवस्थाओं को मजबूत किया जा रहा है ताकि किसी भी संभावित खतरे से समय रहते निपटा जा सके।
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इबोला को अंतरराष्ट्रीय चिंता का सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल घोषित किया है। वहीं अफ्रीका सीडीसी ने इसे महाद्वीपीय स्तर की सार्वजनिक स्वास्थ्य आपात स्थिति माना है।
इबोला एक दुर्लभ लेकिन बेहद गंभीर वायरल संक्रमण माना जाता है, जो शरीर की रक्त वाहिकाओं को प्रभावित कर आंतरिक और बाहरी रक्तस्राव की स्थिति पैदा कर सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार इसकी मृत्यु दर करीब 50 प्रतिशत तक हो सकती है। इस वायरस की पहचान पहली बार वर्ष 1976 में कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य की इबोला नदी क्षेत्र में हुई थी, जिसके नाम पर इसका नाम रखा गया।
विशेषज्ञों के अनुसार यह वायरस संक्रमित व्यक्ति के रक्त और शरीर के तरल पदार्थों जैसे लार, पसीना, उल्टी, मूत्र, मल और अन्य संपर्क माध्यमों से फैल सकता है। संक्रमित वस्तुओं और बीमार या मृत जंगली जानवरों के संपर्क से भी संक्रमण का खतरा रहता है।
इसके शुरुआती लक्षणों में तेज बुखार, कमजोरी, मांसपेशियों में दर्द, सिरदर्द और गले में परेशानी शामिल हो सकती है। बाद में उल्टी, दस्त, त्वचा पर चकत्ते, लीवर और किडनी की कार्यक्षमता प्रभावित होने के साथ कुछ मामलों में रक्तस्राव जैसी गंभीर स्थिति भी सामने आ सकती है। संक्रमण के बाद लक्षण दिखने में 2 से 21 दिन तक का समय लग सकता है।




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