नई दिल्ली, 25 मई।
सर्वोच्च न्यायालय ने स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) प्रक्रिया को पूर्णतः वैध ठहराते हुए एक महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया है। अदालत के इस फैसले के बाद अब देश के 19 राज्यों में मतदाता सूची की विशेष गहन समीक्षा का मार्ग प्रशस्त हो गया है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने स्पष्ट किया कि संविधान के अनुच्छेद 324 और जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 के अंतर्गत चुनाव आयोग के पास वोटर लिस्ट के सत्यापन, संशोधन और जांच करने का पूर्ण अधिकार सुरक्षित है।
न्यायालय ने एसआईआर नोटिफिकेशन को चुनौती देने वाली सभी याचिकाओं को खारिज करते हुए कहा कि एक पारदर्शी, अद्यतन और त्रुटिहीन मतदाता सूची लोकतंत्र की मजबूती के लिए अनिवार्य शर्त है। अदालत ने इस प्रक्रिया को निष्पक्ष चुनावी संचालन हेतु आवश्यक माना है।

इस निर्णय का भारतीय जनता पार्टी ने स्वागत किया है। भाजपा मुख्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में सांसद डॉ. सुधांशु त्रिवेदी ने कांग्रेस पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय ने इस प्रक्रिया को संविधान सम्मत सिद्ध कर दिया है, जो विपक्ष और कांग्रेस पार्टी की संवैधानिक धरातल पर एक बड़ी पराजय है। उन्होंने आरोप लगाया कि अपनी राजनीतिक अक्षमता को छिपाने के लिए विपक्षी दलों ने लोकतांत्रिक संस्थाओं को बदनाम करने का कुप्रयास किया था, जो अब पूरी तरह निष्फल हो गया है। त्रिवेदी ने कांग्रेस को मेहनत के साथ आत्मनिरीक्षण की सलाह भी दी।














