अमेरिका/यूरोप
10 Apr, 2026

हंगरी चुनाव में सोशल मीडिया पर विवाद, फेसबुक पर लगे हस्तक्षेप के आरोप

संसदीय चुनाव से पहले हंगरी में सोशल मीडिया की भूमिका को लेकर सत्तारूढ़ सरकार और टेक कंपनी के बीच विवाद गहराता जा रहा है।

हंगरी, 10 अप्रैल 2026।

हंगरी में संसदीय चुनाव से पहले सियासी माहौल गरमा गया है। प्रधानमंत्री विक्टर ओर्बन ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म फेसबुक और उसकी मूल कंपनी मेटा प्लेटफार्म्स पर चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित करने का गंभीर आरोप लगाया है। उनका कहना है कि मंच विपक्षी नेता पीटर मैग्यार के पक्ष में वातावरण तैयार कर रहा है, जबकि सत्तारूढ़ दल की पहुंच सीमित की जा रही है। हालांकि कंपनी ने इन सभी आरोपों को खारिज कर दिया है। देश में 12 अप्रैल को मतदान होना है।

सरकार का आरोप है कि चुनाव के दौरान फेसबुक की भूमिका निष्पक्ष नहीं है। अधिकारियों का कहना है कि प्रधानमंत्री के पोस्ट की पहुंच कम की जा रही है, जबकि विपक्षी नेता की पोस्ट अधिक लोगों तक पहुंच रही है। इसको लेकर सरकार ने चुनाव में हस्तक्षेप की आशंका जताई है।

सरकारी प्रवक्ता ज़ोल्टन कोवाक्स ने कहा कि मंच का एल्गोरिदम सत्ताधारी दल के खिलाफ काम करता प्रतीत हो रहा है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री के आधिकारिक पेज पर विज्ञापनों पर सख्ती है और स्वाभाविक पहुंच भी कम है, जबकि विपक्षी नेता को निजी प्रोफाइल के माध्यम से अधिक स्वतंत्रता मिल रही है।

एक रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि समान व्यूज होने के बावजूद विपक्षी नेता की पोस्ट पर प्रतिक्रिया कहीं अधिक रही। वहीं सत्तारूढ़ दल से जुड़े कंटेंट पर टिप्पणियों के गायब होने की प्रवृत्ति भी देखी गई, जबकि विपक्षी पेजों पर ऐसा नहीं हुआ।

इन आरोपों पर मेटा ने स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री के खाते पर किसी प्रकार का प्रतिबंध नहीं लगाया गया है और न ही कोई सामग्री हटाई गई है। कंपनी ने सभी आरोपों को निराधार बताया है।

विपक्षी नेता के सहयोगी ने इस स्थिति को उनकी रणनीति और सोशल मीडिया की समझ का परिणाम बताया है। उनका कहना है कि वे तेजी से बदलते समाचार चक्र के अनुरूप काम कर रहे हैं।

इस विवाद की पृष्ठभूमि में हाल की एक घटना भी है, जब फेसबुक ने अस्थायी रूप से सरकार समर्थक तीन समाचार माध्यमों को अवरुद्ध कर दिया था। इस पर राष्ट्रीय मीडिया संगठनों ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर प्रहार बताया था।

बीते दिनों सत्तारूढ़ दल के कुछ नेताओं ने भी अपनी पोस्ट की पहुंच कम किए जाने की बात कही थी। इस संदर्भ में एक कर्मचारी का नाम भी सामने आया, जिस पर सोशल मीडिया गतिविधियों के आधार पर पक्षपात के आरोप लगाए गए।

हंगरी लंबे समय से यह आरोप लगाता रहा है कि बाहरी शक्तियां देश की राजनीति में हस्तक्षेप कर रही हैं। विदेश मंत्री ने भी खुफिया एजेंसियों पर फोन टैपिंग जैसे आरोप लगाए हैं, जबकि प्रधानमंत्री ने ऊर्जा आपूर्ति को लेकर भी बाहरी दबाव का जिक्र किया है।

हाल ही में अमेरिका के उपराष्ट्रपति ने बुडापेस्ट का दौरा कर प्रधानमंत्री का समर्थन किया और यूरोपीय संस्थाओं पर विदेशी चुनावों में दखल के आरोप लगाए। उन्होंने यह भी कहा कि हंगरी की अर्थव्यवस्था को प्रभावित करने के प्रयास किए जा रहे हैं।

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