नई दिल्ली, 29 अप्रैल
भारत ने वर्ष 2030-31 तक 2 ट्रिलियन डॉलर के निर्यात लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में अपनी रणनीति को और तेज कर दिया है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए एमएसएमई, कृषि निर्यात, लॉजिस्टिक्स, प्रमाणन व्यवस्था और वैश्विक ब्रांडिंग पर विशेष जोर देने के निर्देश दिए।
सरकार ने इस लक्ष्य के तहत वस्तु और सेवा निर्यात को 1-1 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचाने की योजना बनाई है। इसके लिए वाणिज्य विभाग ने एक संरचित निर्यात निगरानी ढांचा तैयार किया है, जिसके तहत इंजीनियरिंग, वस्त्र, इलेक्ट्रॉनिक्स, फार्मास्यूटिकल्स, रसायन और सेवा क्षेत्र जैसे प्रमुख सेक्टरों के लिए अलग-अलग रणनीतियां तय की गई हैं।
बैठक में गोयल ने कहा कि निर्यात वृद्धि की सफलता समयबद्ध योजना, मापनीय परिणाम और विभिन्न मंत्रालयों के बीच मजबूत समन्वय पर निर्भर करेगी। उन्होंने निर्यातकों की समस्याओं के त्वरित समाधान और प्रगति की रियल टाइम निगरानी के लिए आईटी आधारित प्रणाली विकसित करने पर भी बल दिया।
बैठक का एक महत्वपूर्ण बिंदु निर्यात प्रोत्साहन मिशन रहा, जिसे खास तौर पर एमएसएमई और छोटे निर्यातकों को सहायता देने के लिए शुरू किया गया है। इस मिशन के तहत व्यापार वित्त और बाजार पहुंच को बेहतर बनाने पर काम किया जा रहा है। इसमें दो उप-योजनाएं शामिल हैं, जिनमें वित्तीय सहायता और बाजार विस्तार की व्यवस्था की गई है।
बताया गया कि इस मिशन के तहत कई घटकों को पहले ही लागू किया जा चुका है, जिनमें ब्याज सहायता, निर्यात वित्तपोषण, ई-कॉमर्स निर्यातकों को ऋण सहायता, गारंटी आधारित सहयोग, जोखिम साझेदारी व्यवस्था, परीक्षण और प्रमाणन सहायता, लॉजिस्टिक्स तथा भंडारण सुविधा शामिल हैं।
मंत्री ने यह भी निर्देश दिए कि इन योजनाओं का लाभ छोटे और पहली बार निर्यात करने वाले कारोबारियों तक पहुंचे। इसके लिए निर्यात प्रोत्साहन परिषदों, वस्तु बोर्डों और क्षेत्रीय विदेशी व्यापार कार्यालयों के माध्यम से जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया गया।
कृषि निर्यात और एमएसएमई को प्राथमिकता देते हुए उन्होंने कहा कि वैश्विक प्रतिस्पर्धा बढ़ाने के लिए विदेशी भंडारण, प्रमाणन व्यवस्था और आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करना जरूरी है। साथ ही आयात प्रतिस्थापन के साथ-साथ निर्यात वृद्धि के अवसरों को भी पहचानने की जरूरत बताई गई।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारत की छवि को मजबूत करने के लिए एकीकृत ब्रांड इंडिया पहचान विकसित करने पर भी बल दिया गया। साथ ही व्यापार मेलों, खरीदार-विक्रेता बैठकों और व्यापार प्रतिनिधिमंडलों का तीन वर्षीय कैलेंडर तैयार करने का सुझाव दिया गया।
बैठक में पश्चिम एशिया संकट से प्रभावित निर्यातकों के लिए तैयार राहत योजना की भी समीक्षा की गई। अंत में कहा गया कि अनुशासित क्रियान्वयन और निरंतर निगरानी के साथ 2 ट्रिलियन डॉलर का निर्यात लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।








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