काठमांडू, 01 मई।
नेपाल सरकार ने प्रधानमंत्री से लेकर उपसचिव स्तर तक के अधिकारियों की संपत्ति की जांच के लिए संपत्ति जांच आयोग का दायरा तय किया है। हाल ही में गठित इस आयोग ने राजपत्र में अपने कार्यादेश की घोषणा की, जिससे आयोग के औपचारिक रूप से काम करने का रास्ता साफ हो गया। इस आयोग का मुख्य उद्देश्य सार्वजनिक पदों पर कार्यरत और सेवानिवृत्त अधिकारियों के संपत्ति विवरण की जांच करना है।
आयोग को जांच के दायरे में राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के अलावा, सभी सार्वजनिक पदाधिकारियों को शामिल किया गया है, लेकिन वर्तमान न्यायाधीशों और नेपाली सेना के अधिकारियों को जांच से बाहर रखा गया है। जांच में उन अधिकारियों के परिवारों और रिश्तेदारों की संपत्तियां भी शामिल होंगी, चाहे वे देश में हों या विदेश में छिपी हों।
आयोग के गठन में उच्चतम न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश राजेन्द्रकुमार भण्डारी की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय टीम का गठन किया गया है। इसमें पूर्व मुख्य न्यायाधीश पुरुषोत्तम पराजुली, पूर्व न्यायाधीश चण्डीराज ढकाल, पूर्व डीआईजी गणेश केसी और चार्टर्ड अकाउंटेंट प्रकाश लम्साल शामिल हैं। आयोग को लोकतंत्र पुनर्स्थापना के बाद के सभी प्रमुख सार्वजनिक पदाधिकारियों की संपत्ति जांचने का अधिकार प्राप्त है।
आयोग द्वारा पहले चरण में वर्ष 2008 तक के सार्वजनिक पदाधिकारियों की संपत्ति की जांच की जाएगी। इसके बाद पूर्व प्रधानमंत्रियों और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों की संपत्तियों का मूल्यांकन किया जाएगा। आयोग उन अधिकारियों पर ध्यान केंद्रित करेगा जिनके खिलाफ भ्रष्टाचार, अनुशासनात्मक कार्रवाई या अन्य आरोप रहे हैं। यदि किसी भी अधिकारी के पास असामान्य रूप से अधिक संपत्ति पाई जाती है, तो गहन जांच की जाएगी।
आयोग अपने कार्यकाल के दौरान विभिन्न सरकारी विभागों, सार्वजनिक संस्थानों, और विदेशों में स्थित संपत्तियों की भी जांच करेगा। यदि जांच के दौरान अवैध संपत्ति की पुष्टि होती है तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की सिफारिश की जाएगी। आयोग से जुड़ी शिकायतों को गुप्त रूप से स्वीकार किया जाएगा और शिकायतकर्ता की पहचान सार्वजनिक नहीं की जाएगी।












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