जम्मू और कश्मीर
01 May, 2026

लद्दाख में बुद्ध अवशेषों की प्रदर्शनी, अमित शाह ने शांति और सहअस्तित्व का महत्व बताया

लद्दाख में बुद्ध अवशेष प्रदर्शनी का शुभारंभ करते हुए अमित शाह ने कहा कि बुद्ध का संदेश आज पहले से अधिक प्रासंगिक है और यह शांति और सहअस्तित्व का संदेश देता है।

लेह, 01 मई।

बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर लद्दाख में भगवान तथागत बुद्ध के पवित्र अवशेषों की पहली राष्ट्रीय प्रदर्शनी का शुभारंभ केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने किया। इस ऐतिहासिक अवसर पर उन्होंने कहा कि यह अवशेष लद्दाख के लिए एक सौभाग्यपूर्ण क्षण हैं, जो पूरी मानवता को शांति, सहअस्तित्व और मध्यम मार्ग का संदेश देते हैं। शाह ने यह भी कहा कि भारत की सभ्यता हमेशा ज्ञान और करुणा पर आधारित रही है, और बुद्ध के संदेश की प्रासंगिकता आज और भी बढ़ गई है।

यह कार्यक्रम लद्दाख के जिवेत्सल मैदान में आयोजित किया गया, जिसमें लद्दाख के उपराज्यपाल वीके सक्सेना, बौद्ध संघ के अध्यक्ष त्सेरिंग दोरजे लाकरूक, और कई प्रमुख धार्मिक एवं आध्यात्मिक गुरु उपस्थित थे। इस दौरान पारंपरिक लामा वादन, त्सोग अर्पण, दीप प्रज्वलन और पवित्र अवशेषों के दर्शन के साथ तिब्बती सांस्कृतिक कार्यक्रम, भक्ति गीत और लद्दाखी लोक नृत्य भी प्रस्तुत किए गए, जो क्षेत्र की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर को प्रदर्शित करते हैं।

अमित शाह ने अपने संबोधन में कहा कि बुद्ध का जीवन, ज्ञान प्राप्ति और महापरिनिर्वाण एक अनोखा संयोग था। उनका जीवन और संदेश अनमोल हैं, जो आज भी मानवता को मार्गदर्शन देते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि जब 75 वर्ष पहले बुद्ध के अवशेष लद्दाख लाए गए थे, तब बुनियादी सुविधाओं की कमी थी, लेकिन अब विकसित अवसंरचना के बीच इन अवशेषों का आगमन नए युग का प्रतीक है।

गृहमंत्री ने लद्दाख को बुद्ध की धम्म भूमि बताया और कहा कि यहां पर बौद्ध विचारों का संरक्षण सदियों से होता आया है। जब दलाई लामा यहां आते हैं, तो वे इसे बौद्ध संस्कृति और करुणा की प्रयोगशाला मानते हैं।

अमित शाह ने सम्राट अशोक के दूतों द्वारा लद्दाख में बौद्ध धर्म के प्रसार और सिल्क रूट के माध्यम से व्यापार और विचारों के आदान-प्रदान का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि बुद्ध का संदेश, आज भी उतना ही प्रासंगिक है जितना पहले था, और पूरी दुनिया को शांति और स्थिरता की दिशा में आगे बढ़ने के लिए बुद्ध के मध्यम मार्ग को अपनाना चाहिए।

उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने इस आयोजन को वैश्विक शांति का संदेश देने वाला बताया और कहा कि यह लद्दाख के लिए एक ऐतिहासिक दिन है। उन्होंने कहा कि लद्दाख में बुद्ध के अवशेषों की उपस्थिति इस बात को पुष्ट करती है कि भारत की सभ्यता शांति और सहअस्तित्व के मूल्यों पर आधारित है।

यह अवशेष 01 मई से 10 मई तक जीवेत्सल मैदान में सार्वजनिक दर्शन के लिए रखे जाएंगे, और इसके बाद 11-12 मई को जांस्कर, और 13-14 मई को लेह के धर्म केंद्र में दर्शनों के लिए रखे जाएंगे। 15 मई को ये अवशेष हवाई मार्ग से दिल्ली वापस भेज दिए जाएंगे।

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