देहरादून, 01 मई
उत्तराखंड में धामी सरकार ने मदरसों को लेकर कड़े नियम लागू कर दिए हैं, जिसके तहत अब सभी मदरसों के लिए उत्तराखंड शिक्षा बोर्ड से मान्यता लेना अनिवार्य कर दिया गया है। इसके बाद राज्य में मदरसों के संचालन पर बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा और अब मनमाना पाठ्यक्रम नहीं चल सकेगा, बल्कि सभी शिक्षण संस्थानों को सरकार द्वारा तय नियमों के अनुसार ही काम करना होगा। इस नई व्यवस्था से राज्य के सैकड़ों मदरसों के बंद होने की स्थिति भी बन गई है।
नई व्यवस्था के अनुसार कक्षा आठ तक के शिक्षण संस्थानों की मान्यता जिला विद्यालय समिति से और इंटर स्तर तक की मान्यता राज्य शिक्षा बोर्ड से ली जाएगी। पहले यह नियम मदरसों पर लागू नहीं था, जहां कई मदरसे निजी भवनों, मस्जिदों और छोटे कमरों में भी संचालित हो रहे थे। अब सभी मदरसों को एक जुलाई से अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण से संबद्धता और शिक्षा बोर्ड से मान्यता लेना जरूरी होगा।
राज्य में पंजीकृत मदरसों की संख्या 452 है, जिनकी मान्यता 30 जून को समाप्त हो जाएगी। सरकार ने मदरसा बोर्ड को समाप्त कर दिया है। पहले सहायता प्राप्त मदरसों की संख्या 192 थी और वक्फ बोर्ड के तहत 117 मदरसे पंजीकृत थे, जिनमें लगभग 46 हजार बच्चे पढ़ाई कर रहे थे। सर्वे के दौरान राज्य में 950 मदरसों की पहचान हुई, जिनमें से कई बिना अनुमति संचालित पाए गए, जिन्हें पहले ही बंद किया जा चुका है।
सर्वे के दौरान फर्जी पहचान, दस्तावेजों में गड़बड़ी और बाहरी राज्यों से बच्चों को लाकर पढ़ाने जैसी स्थितियां भी सामने आई थीं। इन मामलों पर बाल संरक्षण आयोग ने रिपोर्ट तैयार कर सरकार को भेजी थी। इसके बाद सरकार ने शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत पाठ्यक्रम लागू करने का निर्णय लिया है और मदरसों में धार्मिक शिक्षा की जगह निर्धारित पाठ्यक्रम पढ़ाने पर जोर दिया गया है।
अधिकारियों के अनुसार अब सभी मदरसों को भूमि, भवन, शिक्षक योग्यता, बैंक खाते और आर्थिक स्रोतों का पूरा विवरण देना होगा। नियमों का पालन न करने वाले मदरसों पर कार्रवाई करते हुए उन्हें बंद किया जाएगा।












