रायपुर, 30 अप्रैल
छत्तीसगढ़ के सरकारी विद्यालयों में फर्जी नामांकन से जुड़ा बड़ा मामला सामने आया है। अप्रैल 2026 की नवीन रिपोर्टों के अनुसार आधार से जुड़ाव और अंकीय सत्यापन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद यह तथ्य उजागर हुआ कि विद्यालयों में दर्ज विद्यार्थियों की संख्या में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है।
शिक्षा विभाग द्वारा यू-डाइस नामक पोर्टल पर आंकड़ों के विस्तृत परीक्षण के दौरान यह अनियमितता सामने आई। पहले केवल कुल नामांकन दर्ज होने से फर्जी नाम जोड़ना आसान था, लेकिन हाल ही में केंद्र और राज्य स्तर पर विद्यार्थियों के नाम के साथ आधार संख्या और मोबाइल नंबर अनिवार्य कर दिया गया। आधार से मिलान होने पर ऐसे कई नाम अस्वीकृत हो गए जिनका आधार पहले से अन्यत्र दर्ज था या जो पूरी तरह फर्जी पाए गए। इस प्रक्रिया में दस लाख से अधिक ऐसे नाम हट गए जो केवल कागजों पर मौजूद थे।
वर्ष 2024 से 2026 के बीच पहली से दसवीं कक्षा तक आधार से जुड़े सत्यापन में डुप्लीकेट और फर्जी नामांकन सामने आए हैं। अंकीय जांच के बाद वास्तविक संख्या स्पष्ट हुई। वर्ष 2024 में जहां 53.69 लाख विद्यार्थियों को पुस्तकें वितरित की गई थीं, वहीं 2026 में यह संख्या घटकर 43 लाख रह गई। इसके चलते लगभग 50 लाख पुस्तकों की छपाई कम करनी होगी। ऐसे 'काल्पनिक विद्यार्थियों' के नाम पर राशन और बजट जारी होने की बात भी सामने आई है, साथ ही साइकिल और गणवेश जैसी योजनाओं में भी गड़बड़ी की आशंका जताई जा रही है।
यदि वास्तविक संख्या 45 लाख मानी जाए तो चार वर्षों में लगभग 25 लाख अतिरिक्त नामों पर पुस्तकें छापी गईं। प्रति विद्यार्थी 250 रुपये के हिसाब से यह राशि करीब 62.50 करोड़ रुपये बैठती है, जो छपाई और वितरण में अनियमितता की ओर संकेत करती है।
सिर्फ नामांकन ही नहीं, शिक्षा विभाग के अन्य स्तरों पर भी गंभीर गड़बड़ियां उजागर हुई हैं। कबीरधाम जिले के विकासखंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय में 218 करोड़ रुपये की अनियमितता सामने आई है, जहां बिना किसी रजिस्टर या नकद पुस्तिका के धन निकासी की गई। वहीं दुर्ग सहित अन्य जिलों में स्वामी आत्मानंद विद्यालयों में फर्जी नियुक्ति पत्र और अधिकारियों के नकली अंकीय हस्ताक्षर के मामले भी सामने आए हैं। रायपुर के कई निजी और सरकारी विद्यालयों में 'डमी विद्यार्थियों' और फर्जी नामांकन की घटनाएं भी उजागर हुई हैं। कुछ संस्थानों पर भी कार्रवाई की गई है। इसी जिले में नियुक्ति के नाम पर फर्जी हस्ताक्षर वाले ज्वाइनिंग पत्र बांटने का मामला सामने आया है। बिलासपुर और मुंगेली जिलों में गलत मान्यता दिखाकर नामांकन बढ़ाने और फंड के दुरुपयोग की जांच जारी है।
सरकार ने इस प्रकरण में रायपुर और सरगुजा संभाग के तीन संयुक्त संचालकों सहित लगभग दस अधिकारियों को नामांकन और शिक्षक पदस्थापना में अनियमितता के आरोप में निलंबित किया है।
छत्तीसगढ़ सरकार ने पाठ्यपुस्तक निगम के प्रबंध संचालक के नेतृत्व में एक उच्च स्तरीय समिति गठित की है, जो पुस्तक वितरण और फर्जी नामांकन से जुड़े वित्तीय पहलुओं की जांच कर रही है। साथ ही दुर्ग और भिलाई के विद्यालयों में फर्जी नियुक्तियों को लेकर प्राचार्यों से स्पष्टीकरण मांगा गया है। अब अंकीय आंकड़ों के आधार पर उन विद्यालयों और अधिकारियों की पहचान की जा रही है जिन्होंने कागजों पर संख्या बढ़ाकर सरकारी धन का दुरुपयोग किया है।
शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि आधार से जुड़ाव के माध्यम से व्यवस्था को पूरी तरह पारदर्शी बनाया जा रहा है। हटाए गए दस लाख 'काल्पनिक विद्यार्थियों' के कारण पुस्तक, भोजन और गणवेश पर होने वाले करोड़ों रुपये के वार्षिक व्यय की बचत होगी तथा दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी।





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