भोपाल, 09 मई।
करीब सौ साल बाद मध्य प्रदेश के कान्हा टाइगर रिजर्व में जंगली भैंसों की वापसी ने वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में नई उम्मीद जगाई है। काजीरंगा से लाए गए चार और जंगली भैंसों को सुपखार क्षेत्र में छोड़ा गया है। इसके साथ ही कान्हा में इनकी कुल संख्या बढ़कर आठ हो गई है।
वन विभाग के अनुसार, जंगली भैंस पुनर्स्थापना कार्यक्रम के दूसरे चरण में शुक्रवार को सुपखार परिक्षेत्र में चार जंगली भैंसों को विशेष रूप से तैयार किए गए बाड़े में सफलतापूर्वक छोड़ा गया। इस दौरान वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी और स्थानीय वन अमला भी मौजूद रहा।
प्रदेश में जैव विविधता संरक्षण और विलुप्तप्राय प्रजातियों के पुनर्वास के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इसी कड़ी में असम के काजीरंगा टाइगर रिजर्व से जंगली भैंसों को कान्हा के सुपखार क्षेत्र में पुनर्स्थापित किया जा रहा है। यह वही इलाका है, जहां पहले ऐतिहासिक रूप से जंगली भैंसों की मौजूदगी के प्रमाण मिल चुके हैं।
इस परियोजना के पहले चरण में 28 अप्रैल को चार जंगली भैंसों को सुपखार स्थित विशेष बाड़े में छोड़ा गया था। अब दूसरे चरण में चार और भैंसों के पहुंचने से संख्या आठ हो गई है। विभाग का कहना है कि आने वाले चरणों में भी इस परियोजना का विस्तार किया जाएगा, जिससे प्रदेश में जंगली भैंसों की स्थायी और स्वस्थ आबादी विकसित हो सके।
वन विभाग ने बताया कि काजीरंगा से कान्हा तक लगभग 2,220 किलोमीटर की दूरी विशेष वन्यजीव परिवहन वाहनों के जरिए तय की गई। पूरे सफर के दौरान विशेषज्ञ वन्यजीव चिकित्सकों की टीम लगातार स्वास्थ्य परीक्षण और निगरानी करती रही। यह अभियान करीब 72 घंटे तक चला।
जंगली भैंस भारतीय वन्यजीव धरोहर का अहम हिस्सा मानी जाती है और वन पारिस्थितिकी तंत्र के संतुलन में भी इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है। वन विभाग को उम्मीद है कि इस पहल से कान्हा की जैव विविधता और समृद्ध होगी तथा यह परियोजना वन्यजीव पुनर्स्थापना के सफल मॉडल के रूप में पहचान बना सकेगी।



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