नई दिल्ली, 16 मई।
कॉकरोच टिप्पणी से जुड़े विवाद पर भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने स्पष्टीकरण जारी करते हुए कहा है कि उनके बयान को मीडिया के एक हिस्से ने गलत तरीके से प्रस्तुत किया है। उन्होंने कहा कि यह मामला एक तुच्छ सुनवाई के दौरान की गई मौखिक टिप्पणी से जुड़ा था, जिसे तोड़-मरोड़कर पेश किया गया।
मुख्य न्यायाधीश ने स्पष्ट किया कि उनकी टिप्पणी का उद्देश्य उन व्यक्तियों की आलोचना करना था, जो फर्जी और नकली डिग्रियों के आधार पर वकालत जैसे पेशों में प्रवेश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे ही लोग मीडिया, सोशल मीडिया और अन्य प्रतिष्ठित क्षेत्रों में भी घुसपैठ कर रहे हैं, इसलिए उनकी तुलना परजीवी प्रवृत्ति से की गई थी।
उन्होंने यह भी कहा कि यह कहना पूरी तरह गलत है कि उन्होंने देश के युवाओं की आलोचना की है। उनके अनुसार उन्हें न केवल वर्तमान बल्कि भविष्य के मानव संसाधन पर भी गर्व है और भारत का हर युवा उन्हें प्रेरित करता है।
मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि भारतीय युवाओं के प्रति उनके मन में गहरा सम्मान है और वे उन्हें विकसित भारत के निर्माण के मजबूत स्तंभों के रूप में देखते हैं। उन्होंने कहा कि उनकी टिप्पणी को गलत संदर्भ में प्रस्तुत किया गया, जिससे अनावश्यक विवाद उत्पन्न हुआ।










