नई दिल्ली, 16 मई।
भारत में इस वर्ष सामान्य से कम वर्षा की आशंका के बीच सुपर अल नीनो के सक्रिय होने की संभावना जताई गई है, जिससे सूखे और भीषण गर्मी की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। अमेरिकी मौसम एजेंसी के अनुसार यह स्थिति मई से जुलाई के बीच विकसित हो सकती है, जिस पर मौसम विशेषज्ञ लगातार नजर बनाए हुए हैं।
रिपोर्ट के अनुसार प्रशांत महासागर के तापमान में इस समय लगभग शून्य दशमलव पांच डिग्री सेल्सियस की वृद्धि दर्ज की गई है, जो मानसून अवधि तक बनी रह सकती है। पहले इस स्थिति की संभावना इकसठ प्रतिशत आंकी गई थी, जो अब बढ़कर बयासी प्रतिशत तक पहुंच गई है, जिससे मौसम पैटर्न में बड़े बदलाव की आशंका बढ़ गई है।
भारतीय मौसम विभाग के प्रमुख ने कहा है कि इस स्थिति का सीधा असर मानसून वर्षा पर पड़ेगा और देश में सूखे की संभावना और अधिक बढ़ सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार यदि यह प्रभाव मजबूत होता है तो कृषि क्षेत्र पर भी गंभीर असर देखने को मिल सकता है।
अल नीनो वह मौसमीय स्थिति है जिसमें समुद्र का जल असामान्य रूप से गर्म हो जाता है, जिससे वायुमंडलीय प्रवाह में बदलाव आता है और वैश्विक वर्षा चक्र प्रभावित होता है। इसके चलते कहीं सूखा और कहीं अत्यधिक वर्षा की स्थिति बन जाती है, जो लंबे समय तक मौसम संतुलन को प्रभावित करती है।
इसके प्रभाव से मानसूनी हवाओं की दिशा और तीव्रता में बदलाव आ सकता है, जिससे वर्षा में कमी और तापमान में वृद्धि की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। इससे कई क्षेत्रों में भीषण गर्मी और सूखे का खतरा बढ़ जाता है, साथ ही कुछ स्थानों पर चक्रवात और अधिक वर्षा की संभावना भी बनती है।
भारत में उत्तर, पश्चिम और मध्य क्षेत्रों में सूखे की आशंका अधिक बताई गई है। पंजाब, हरियाणा और राजस्थान में अगस्त और सितंबर के दौरान स्थिति अधिक गंभीर रहने की संभावना है। मध्य प्रदेश के कई हिस्सों जैसे इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर, चंबल, जबलपुर, रीवा, शहडोल, सागर और नर्मदापुरम में सामान्य से कम वर्षा का अनुमान है। वहीं कुछ क्षेत्रों में इसका प्रभाव अपेक्षाकृत कम रहने की संभावना जताई गई है। मौसम विभाग लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है।









