कोलकाता, 5 मई।
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में तृणमूल कांग्रेस को बड़े राजनीतिक झटके का सामना करना पड़ा है, जहां सत्ता विरोधी लहर का स्पष्ट असर देखने को मिला और पार्टी के कई वरिष्ठ चेहरे चुनाव हार गए।
चुनाव में उतरे 35 मंत्रियों में से 22 मंत्रियों को अपनी सीटें गंवानी पड़ीं, जिसे राजनीतिक जानकार राज्य में गहरी एंटी-इनकंबेंसी का संकेत मान रहे हैं। यह आंकड़ा लगभग 63 प्रतिशत हार का प्रतिनिधित्व करता है।
परिणामों में सबसे बड़ा झटका मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को भी लगा, जो भवानीपुर सीट से चुनाव हार गईं। इस परिणाम को राज्य की जनता द्वारा नेतृत्व और शासन शैली के प्रति असंतोष के रूप में देखा जा रहा है।
कई विश्लेषकों का मानना है कि मतदाताओं ने इस बार केवल उम्मीदवारों को नहीं बल्कि पूरी सत्ताधारी व्यवस्था और उसके कार्यप्रणाली को नकार दिया है।
हारने वाले मंत्रियों में महिला एवं बाल विकास, उद्योग, आवास, बिजली, शिक्षा, परिवहन और पिछड़ा वर्ग कल्याण जैसे महत्वपूर्ण विभागों से जुड़े नेता शामिल हैं, जिससे सरकार की राजनीतिक स्थिति पर बड़ा असर पड़ा है।
पराजित प्रमुख नेताओं में अरूप बिस्वास, ब्रत्य बसु, चंद्रिमा भट्टाचार्य, शशि पांजा, सुजीत बोस, इंद्रनील सेन, बेचेराम मन्ना, स्वपन देबनाथ, बुलु चिक बड़ाइक, प्रदीप मजूमदार, बिरबाहा हांसदा, मानस रंजन भुइयां, मलय घटक, सिद्दीकुल्लाह चौधरी, उदयन गुहा, संध्यारानी टुडू, बंकिम चंद्र हाजरा, उज्जल बिस्वास, स्नेहासिस चक्रवर्ती, श्रीकांत महतो और सत्यजीत बर्मन जैसे नाम शामिल हैं।
कई सीटों पर हार का अंतर भी काफी बड़ा रहा, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि विरोधी उम्मीदवारों को निर्णायक बढ़त मिली। शशि पांजा, चंद्रिमा भट्टाचार्य और उदयन गुहा जैसे वरिष्ठ नेताओं को बड़े अंतर से हार का सामना करना पड़ा।
विशेषज्ञों के अनुसार यह परिणाम राज्य की राजनीति में बड़े बदलाव का संकेत है, जहां सत्ता विरोधी लहर ने सत्ताधारी दल के मजबूत माने जाने वाले गढ़ों को भी प्रभावित किया है।





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