नई दिल्ली, 16 मई।
स्वापक नियंत्रण ब्यूरो ने ‘ऑपरेशन रेजपिल’ के तहत बड़ी अंतरराष्ट्रीय मादक तस्करी रैकेट का भंडाफोड़ करते हुए 227.7 किलोग्राम कैप्टागॉन की गोलियां और चूर्ण जब्त किया है, जिसकी कीमत करीब 182 करोड़ रुपये आंकी गई है। इस मामले में सीरिया के एक नागरिक को गिरफ्तार किया गया है, जो वीजा अवधि समाप्त होने के बाद भी भारत में अवैध रूप से रह रहा था।
केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने इस कार्रवाई पर एनसीबी टीम की सराहना करते हुए कहा कि ‘ऑपरेशन रेजपिल’ के माध्यम से देश में पहली बार कैप्टागॉन की बड़ी जब्ती दर्ज की गई है। उन्होंने दोहराया कि सरकार नशामुक्त भारत के लक्ष्य को लेकर पूरी तरह प्रतिबद्ध है और देश को किसी भी स्थिति में मादक पदार्थों के ट्रांजिट रूट के रूप में इस्तेमाल नहीं होने दिया जाएगा।
गृह मंत्रालय के अनुसार विदेशी एजेंसी से मिली सूचना के आधार पर 11 मई को दक्षिणी दिल्ली के नेब सराय क्षेत्र में एक मकान पर छापा मारा गया, जहां से 31.5 किलोग्राम कैप्टागॉन गोलियां बरामद हुईं। ये नशीले पदार्थ चपाती बनाने वाली मशीन में छिपाकर रखे गए थे और इन्हें सऊदी अरब के जेद्दा भेजने की योजना थी।
जांच में यह भी सामने आया कि गिरफ्तार सीरियाई नागरिक 15 नवंबर 2024 को पर्यटक वीजा पर भारत आया था, लेकिन उसका वीजा 12 जनवरी 2025 को समाप्त हो चुका था। इसके बावजूद वह अवैध रूप से देश में रहकर उसी मकान से तस्करी गतिविधियों का संचालन कर रहा था।
एनसीबी की आगे की कार्रवाई में 14 मई को गुजरात के मुंद्रा स्थित कंटेनर सुविधा केंद्र से 196.2 किलोग्राम कैप्टागॉन चूर्ण भी बरामद किया गया, जिसे सीरिया से भेजे गए कंटेनर में भेड़ की ऊन के नाम पर छिपाया गया था और तीन बैगों में रखा गया था।
मंत्रालय के अनुसार प्रारंभिक जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि यह पूरी खेप खाड़ी देशों, विशेषकर सऊदी अरब और पश्चिम एशिया में भेजी जानी थी, जहां कैप्टागॉन का दुरुपयोग गंभीर सामाजिक और सुरक्षा चुनौती माना जाता है।
एनसीबी ने बताया कि कैप्टागॉन फेनेटाइलीन और एम्फेटामीन जैसे प्रतिबंधित मन:प्रभावी पदार्थों से निर्मित होता है और इसके नेटवर्क की जांच में धन शोधन, हवाला चैनल, विदेशी संपर्क और अंतरराष्ट्रीय तस्करी रूट की पड़ताल की जा रही है। एजेंसी ने इसे भारत में इस ड्रग की पहली बड़ी जब्ती बताते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय गिरोह भारत को ट्रांजिट हब बनाने की कोशिश कर रहे हैं, जिसके खिलाफ संयुक्त एजेंसियों के साथ कार्रवाई जारी रहेगी।









