लखनऊ, 20 अप्रैल।
उत्तर प्रदेश की राजनीति के एक युग का अंत हो गया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अरुण कुमार सिंह 'मुन्ना' का उपचार के दौरान निधन हो गया। मूल रूप से जौनपुर के निवासी मुन्ना न केवल एक कुशल राजनीतिज्ञ थे, बल्कि अपनी प्रखर वक्तृत्व शैली के लिए भी जाने जाते थे। उनके निधन की खबर मिलते ही उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी सहित राजनीतिक हलकों में शोक की लहर व्याप्त हो गई। वे छात्र राजनीति के दौर से ही जनसेवा के कार्यों में निरंतर समर्पित रहे।
उनके निधन पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए राज्यसभा में विपक्षी दल के नेता प्रमोद तिवारी ने इसे एक व्यक्तिगत क्षति बताया। तिवारी ने भावुक होते हुए कहा कि स्व. मुन्ना का राजनीतिक सफर प्रयागराज विश्वविद्यालय की छात्र राजनीति से शुरू हुआ था। वे कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी चुनाव जीतने का हुनर रखते थे। वर्ष 1977 की विपरीत लहर में भी उन्होंने कांग्रेस के टिकट पर जीत दर्ज की थी। वे गांधी परिवार के प्रति अटूट निष्ठा और समर्पण के लिए पहचाने जाते थे।
प्रमोद तिवारी ने अपने पुराने दिनों को याद करते हुए बताया कि मुन्ना उनके सहपाठी थे और उनका साथ प्रतापगढ़ के कुंडा स्थित एस.पी. इंटरमीडिएट कॉलेज से शुरू हुआ था। साठ के दशक से प्रारंभ हुआ यह मित्रता और राजनीति का सफर एक लंबे अंतराल तक चला। उन्होंने मुन्ना को गरीबों का सच्चा हितैषी और मसीहा करार दिया, जिनके जाने से समाज के एक बड़े तबके ने अपना रक्षक खो दिया है।
स्व. अरुण कुमार सिंह मुन्ना का राजनीतिक करियर बेहद गौरवशाली रहा। उन्होंने प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी संभालने के साथ-साथ भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और प्रदेश युवा कांग्रेस अध्यक्ष के रूप में भी महत्वपूर्ण सेवाएं दीं। वे उत्तर प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री के पद पर रहकर जनहित के कई कार्यों के सूत्रधार भी रहे। उनके जाने से पार्टी संगठन को एक अपूरणीय क्षति हुई है।










