मध्य प्रदेश
13 May, 2026

नागपुर एयरपोर्ट के आधुनिकीकरण को मंजूरी, पीपीपी मॉडल पर होगा बड़ा विस्तार

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने नागपुर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के विकास और आधुनिकीकरण को मंजूरी देते हुए इसे अगले तीस वर्षों के लिए पीपीपी मॉडल के तहत जीएमआर समूह को सौंपने का रास्ता साफ कर दिया है।

नागपुर, 13 मई।

नागपुर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के विकास और आधुनिकीकरण को लेकर केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में बड़ा निर्णय लिया गया है। सरकार ने भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण की उस भूमि की लीज अवधि बढ़ाने को मंजूरी दे दी है, जो पहले मिहान इंडिया लिमिटेड को दी गई थी। इस फैसले के बाद अब अगले तीस वर्षों के लिए हवाई अड्डे के संचालन और विकास का मार्ग जीएमआर समूह की सहयोगी कंपनी जीएमआर नागपुर इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड के लिए पूरी तरह से साफ हो गया है।

इस निर्णय के बाद हवाई अड्डे को अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस करने और मध्य भारत के प्रमुख विमानन एवं कार्गो केंद्र के रूप में विकसित करने की प्रक्रिया और तेज होने की उम्मीद है। पूरा विकास कार्य सार्वजनिक-निजी भागीदारी मॉडल के तहत किया जाएगा। मंजूरी के बाद जीएमआर कंपनी चरणबद्ध तरीके से विस्तार कार्य को आगे बढ़ाएगी। योजना के अनुसार यात्री क्षमता को बढ़ाकर तीन करोड़ प्रति वर्ष तक ले जाने का लक्ष्य रखा गया है, जबकि वर्तमान क्षमता लगभग बीस लाख यात्रियों की है।

विकास योजना के तहत नए अत्याधुनिक टर्मिनल का निर्माण किया जाएगा, जिसकी शुरुआती क्षमता लगभग चालीस लाख यात्रियों प्रतिवर्ष होगी। इसके साथ ही चार हजार मीटर लंबा नया रनवे तैयार किया जाएगा और मौजूदा तीन हजार दो सौ मीटर रनवे को बढ़ाकर तीन हजार छह सौ मीटर किया जाएगा। इन बदलावों से हवाई अड्डे की संचालन क्षमता में बड़ा विस्तार होगा।

नागपुर हवाई अड्डे के विकास की प्रक्रिया वर्ष दो हजार नौ में शुरू हुई थी, जब भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण और महाराष्ट्र हवाई अड्डा विकास कंपनी ने मिलकर मिहान इंडिया लिमिटेड का गठन किया था। इसमें एएआई की उन्चास प्रतिशत और एमएडीसी की इक्यावन प्रतिशत हिस्सेदारी तय की गई थी। उसी वर्ष संपत्तियों का हस्तांतरण भी किया गया, लेकिन भूमि सीमांकन विवादों के कारण लीज समझौते में देरी होती रही। बाद में लीज अवधि छह अगस्त दो हजार उनतालीस तक तय की गई थी।

वर्ष दो हजार सोलह में मिहान इंडिया लिमिटेड ने सार्वजनिक-निजी भागीदारी मॉडल के तहत संचालन के लिए वैश्विक निविदा जारी की थी, जिसमें जीएमआर समूह सबसे बड़ी बोलीदाता के रूप में सामने आया। बाद में निविदा रद्द होने पर मामला न्यायालय तक पहुंचा, जहां उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायालय दोनों ने जीएमआर के पक्ष में निर्णय दिया। इसके बाद आठ अक्टूबर दो हजार चौबीस को मिहान इंडिया लिमिटेड और जीएमआर के बीच रियायत समझौते पर हस्ताक्षर किए गए।

मिहान परियोजना के तहत नागपुर को देश के प्रमुख एयर कार्गो केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना भी शामिल है। विस्तार के बाद कार्गो हैंडलिंग क्षमता नौ लाख टन प्रतिवर्ष तक पहुंचने का अनुमान है, जिससे कृषि उत्पाद, फार्मा और विनिर्माण क्षेत्र को बड़ा लाभ मिलेगा। वर्तमान में नागपुर से मुंबई, दिल्ली, पुणे सहित कुछ घरेलू शहरों और कतर तथा शारजाह के लिए सीधी उड़ानें संचालित हो रही हैं।

हवाई अड्डे के विस्तार के बाद घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि की संभावना है। सरकार का मानना है कि निजी क्षेत्र की दक्षता और सरकारी निगरानी के संयोजन से नागपुर हवाई अड्डा आधुनिक सुविधाओं, बेहतर कनेक्टिविटी और मजबूत कार्गो नेटवर्क के साथ देश के प्रमुख विमानन केंद्रों में शामिल हो सकेगा।

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