नई दिल्ली, 01 मई।
गृह मंत्रालय ने नागरिकता (संशोधन) नियम, 2026 को लागू कर दिया है। नए प्रावधानों के अनुसार अब ओवरसीज सिटिजन ऑफ इंडिया के लिए आवेदन प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन कर दी गई है। इसके साथ ही अब आवेदकों को भौतिक कार्ड के साथ-साथ ई-ओसीआई दस्तावेज की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी, जिससे पूरी प्रक्रिया अधिक सरल और डिजिटल हो सकेगी।
नए नियमों में यह स्पष्ट किया गया है कि कोई भी नाबालिग एक साथ भारतीय और विदेशी पासपोर्ट नहीं रख सकता। यह प्रावधान दोहरी नागरिकता से जुड़े मामलों में स्पष्टता लाने के उद्देश्य से जोड़ा गया है। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि ओसीआई का दर्जा एक विशेषाधिकार है, न कि कोई अधिकार।
सरकारी प्रावधानों के अनुसार यदि किसी ओसीआई कार्ड धारक द्वारा भारतीय कानूनों का उल्लंघन किया जाता है, तो उसका पंजीकरण रद्द किया जा सकता है। यह व्यवस्था नियमों के पालन को सुनिश्चित करने के लिए लागू की गई है।
ओसीआई कार्ड धारकों को भारत में आजीवन बहु-प्रवेश वीजा की सुविधा मिलती है। इसके साथ ही उन्हें आर्थिक और शैक्षणिक क्षेत्रों में कई लाभ भी प्राप्त होते हैं। हालांकि सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि ओसीआई धारकों को मतदान का अधिकार या किसी संवैधानिक पद पर आसीन होने का अधिकार नहीं दिया जाता है।
सरकार ने ओसीआई रजिस्ट्रेशन रद्द करने के नियमों को और सख्त कर दिया है। यदि किसी धारक को दो वर्ष या उससे अधिक की सजा होती है या सात वर्ष या उससे अधिक सजा वाले अपराध में आरोप पत्र दाखिल किया जाता है, तो उसका पंजीकरण रद्द किया जा सकता है।
ओसीआई योजना वर्ष 2005 में नागरिकता अधिनियम 1955 में संशोधन के माध्यम से शुरू की गई थी। इस योजना के तहत भारतीय मूल के लोगों को ओसीआई दर्जा दिया जाता है। हालांकि पाकिस्तान और बांग्लादेश से जुड़े व्यक्तियों को इस योजना में शामिल नहीं किया जाता है।
सरकार का कहना है कि नए नियमों का उद्देश्य प्रक्रिया को पारदर्शी बनाना और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करना है। इसके साथ ही डिजिटल व्यवस्था को बढ़ावा देना भी प्रमुख लक्ष्य है।
प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार ऑनलाइन प्रणाली से आवेदन प्रक्रिया में तेजी आएगी और दस्तावेजों के सत्यापन में पारदर्शिता बढ़ेगी। आने वाले समय में पूरी प्रक्रिया को और अधिक सरल बनाए जाने की योजना भी है।









