बैतूल, 11 मई।
मध्य प्रदेश के बैतूल जिले में सोमवार को न्यूजीलैंड के तीन सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने नाँदा ग्राम पहुंचकर शहद संग्रहण और प्रसंस्करण की व्यवस्थाओं का अवलोकन किया। प्रतिनिधियों ने स्थानीय समूहों और कार्यकर्ताओं से संवाद कर आजीविका गतिविधियों की जानकारी ली तथा नाँदा हनी की गुणवत्ता और प्रोसेसिंग व्यवस्था की सराहना की।
पश्चिम वन मंडल क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पंचायत नाँदा स्थित फॉरेस्ट रेस्ट हाउस में आयोजित प्रस्तुति के दौरान वन विभाग के अधिकारियों ने प्रतिनिधिमंडल को शहद की प्रारंभिक प्रसंस्करण प्रक्रिया से अवगत कराया। अधिकारियों ने बताया कि वन समिति से जुड़े लोगों को मधुमक्खी पालन और शहद संग्रहण का प्रशिक्षण देकर रोजगार से जोड़ा गया है, जिससे उनकी आय में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला है। हनी कलेक्शन सेंटर स्थापित होने के बाद शहद के दाम में भी बड़ा बदलाव आया है। पहले करीब 55 रुपये प्रति किलो मिलने वाला शहद अब लगभग 280 रुपये प्रति किलो तक बिक रहा है।
प्रतिनिधिमंडल को शहद की शुद्धता जांच, नमी परीक्षण, लैब परीक्षण, संग्रहण, पैकेजिंग और सहकारी समितियों के माध्यम से विपणन की पूरी प्रक्रिया की जानकारी दी गई। इस दौरान गुणवत्ता नियंत्रण, मिलावट रोकने के उपाय, औषधीय उपयोग और परीक्षण मानकों को लेकर प्रतिनिधियों ने विशेष रुचि दिखाई। साथ ही न्यूजीलैंड की उन्नत मधुमक्खी पालन तकनीक और तकनीकी सहयोग की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई।
फॉरेस्ट रेस्ट हाउस भ्रमण के बाद प्रतिनिधिमंडल ने प्राथमिक प्रोसेसिंग सेंटर पहुंचकर शहद प्रसंस्करण की पूरी व्यवस्था को करीब से देखा। यहां कच्चे माल के संग्रहण से लेकर लैब जांच, अर्ध-स्वचालित मशीनों से शहद भरने और पैकेजिंग की प्रक्रिया की जानकारी साझा की गई। प्रतिनिधियों ने गुणवत्ता नियंत्रण व्यवस्थाओं की प्रशंसा भी की।
वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि नाँदा हनी की नियंत्रित नमी इसकी प्रमुख पहचान है, जिसके चलते देश के साथ विदेशों में भी इसकी मांग लगातार बढ़ रही है। यहां शहद के साथ वैक्स का उत्पादन भी किया जा रहा है, जिसका उपयोग औषधीय कार्यों में हो रहा है।
प्रतिनिधिमंडल में न्यूजीलैंड के विभिन्न विभागों से जुड़े अधिकारी शामिल रहे। इस दौरान वन मंडल अधिकारी नवीन गर्ग सहित अन्य अधिकारी भी मौजूद रहे। दौरे की शुरुआत जनजातीय कलाकारों द्वारा पारंपरिक नृत्य प्रस्तुति से हुई। प्रतिनिधियों ने वन क्षेत्र में पेड़ों पर बने छत्तों से सुरक्षा उपकरणों की मदद से शहद संग्रहण का प्रदर्शन भी देखा और स्थानीय कार्यकर्ताओं के प्रयासों की सराहना की।



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