कानपुर, 22 अप्रैल।
पहलगाम आतंकी हमले में मारे गए कानपुर के कारोबारी शुभम द्विवेदी की पत्नी ऐशान्या ने कहा कि उनके सामने पति को गोली मारे जाने की घटना का दर्द जीवनभर नहीं मिट सकता। उन्होंने मांग की कि इस हमले में मारे गए सभी 26 लोगों को शहीद का दर्जा दिया जाए, तभी उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि मानी जाएगी।
ऐशान्या ने बताया कि इस हमले में उनके पति सहित 25 अन्य लोगों की भी उनकी पत्नियों के सामने निर्मम हत्या की गई। आतंकियों ने पर्यटकों की पहचान पूछकर उन्हें निशाना बनाया और कुल 26 निर्दोष लोगों की जान ले ली। उन्होंने कहा कि यह पूरी घटना मानवता पर सीधा हमला थी।
जानकारी के अनुसार श्यामनगर निवासी 30 वर्षीय शुभम द्विवेदी की शादी 12 फरवरी 2025 को हुई थी। विवाह के कुछ ही समय बाद 18 अप्रैल को वह अपनी पत्नी के साथ कश्मीर यात्रा पर निकले थे, लेकिन यह सफर 22 अप्रैल को दर्दनाक हादसे में बदल गया। घटना ने पूरे परिवार की खुशियों को पूरी तरह खत्म कर दिया।
एक वर्ष बाद भी परिवार इस घटना के सदमे से उबर नहीं पाया है। ऐशान्या के अनुसार उस दिन की चीखें और दृश्य आज भी उन्हें परेशान करते हैं और सामान्य जीवन असंभव सा हो गया है। परिवार में अब किसी उत्सव का माहौल नहीं रहता।
शुभम के पिता संजय द्विवेदी ने बताया कि घटना के बाद कई जनप्रतिनिधियों ने परिवार से संपर्क किया और सहायता भी मिली, लेकिन वास्तविक शांति तभी संभव है जब आतंकवाद पूरी तरह समाप्त हो जाए।
परिवार के अनुसार शुभम की मां बेटे की याद में बार-बार भावुक होकर टूट जाती हैं। 26 फरवरी और 12 फरवरी की तारीखें परिवार के लिए सबसे कठिन दिन बन चुकी हैं, जबकि हर महीने की 22 तारीख उस भयावह घटना की याद दिलाती है। इस दिन परिवार गांव में उनके नाम से भोजन कराकर स्मृति को जीवित रखता है।
शुभम की स्मृति में बुधवार को श्रद्धांजलि सभा आयोजित की गई, जिसमें जनप्रतिनिधियों के शामिल होने की संभावना रही। ऐशान्या ने एक बार फिर दोहराया कि यह केवल आतंकी हमला नहीं बल्कि पहचान के आधार पर किया गया अमानवीय कृत्य था और सभी 26 मृतकों को शहीद का दर्जा मिलना चाहिए।






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