नई दिल्ली, 25 अप्रैल
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने 2026 में प्रस्तावित नए दिशा-निर्देशों के तहत ₹10,000 से अधिक के यूपीआई लेन-देन पर कड़े नियम लागू करने का निर्णय लिया है। यह कदम बढ़ते वित्तीय धोखाधड़ी को रोकने के लिए उठाया गया है। इन नए नियमों के तहत विशेष रूप से पर्सन-टू-पर्सन (P2P) ट्रांजैक्शंस के लिए एक घंटा "कूलिंग-ऑफ" अवधि निर्धारित की जाएगी।
इसके अनुसार, ₹10,000 से अधिक की रकम ट्रांसफर करने पर यह राशि तत्काल तो आपके खाते से डेबिट हो जाएगी, लेकिन यह राशि प्राप्तकर्ता के खाते में भेजे जाने से पहले 60 मिनट तक रोकी जाएगी। इसका उद्देश्य यह है कि उपयोगकर्ता धोखाधड़ी या अनजाने में हुई गलत ट्रांजैक्शंस को पहचान सकें और रद्द कर सकें।
इन नए दिशा-निर्देशों के तहत कुछ ट्रांजैक्शंस को इससे बाहर रखा गया है। व्यापारी भुगतान (P2M) जैसे दुकान, पेट्रोल पंप या दैनिक उपयोग की वस्तुओं के लिए किए गए भुगतान पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। इसके अलावा, ₹10,000 से कम के ट्रांजैक्शंस पर यह नया नियम लागू नहीं होगा और वे तत्काल प्रभाव से किए जा सकेंगे। इस प्रकार, छोटे लेन-देन पर कोई रुकावट नहीं आएगी।
इसके अतिरिक्त, आरबीआई ने कुछ और सुरक्षा उपायों का प्रस्ताव रखा है। विशेष रूप से वरिष्ठ नागरिकों और अन्य संवेदनशील उपयोगकर्ताओं के लिए ₹50,000 से अधिक के ट्रांजैक्शंस को एक "विश्वसनीय व्यक्ति" से स्वीकृति प्राप्त करने की आवश्यकता हो सकती है। साथ ही, धोखाधड़ी के संदेह में उपयोगकर्ताओं के पास एक "किल स्विच" फीचर होगा, जिसके द्वारा वे अपने खाते से सभी डिजिटल भुगतान तुरंत रोक सकते हैं। इसके अलावा, उपयोगकर्ताओं को अपने विश्वसनीय संपर्कों को "व्हाइटलिस्ट" करने का विकल्प भी दिया जाएगा, जिससे इन संपर्कों से किए गए ट्रांजैक्शंस के लिए 1 घंटे की देरी को खत्म किया जा सकेगा।
यह प्रस्तावित नियम वर्तमान में एक चर्चा पत्र का हिस्सा हैं, जिन्हें आरबीआई ने अप्रैल 2026 में जारी किया है। हालांकि ये अभी तक लागू नहीं हुए हैं, आरबीआई इन नियमों पर सार्वजनिक प्रतिक्रिया भी मांग रहा है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि डिजिटल भुगतान के क्षेत्र में सुरक्षा के मानक बढ़े और उपयोगकर्ताओं का विश्वास कायम रहे।







