नई दिल्ली, 25 अप्रैल
भारत की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शनिवार को भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) से पूरे वित्तीय प्रणाली में केवाईसी (नो योर कस्टमर) प्रक्रिया को सरल और एक समान बनाने की आवश्यकता जताई। उन्होंने सेबी के 38वें स्थापना दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाने की अपील की। वित्त मंत्री ने कहा कि एक ऐसा केवाईसी सिस्टम होना चाहिए, जो न केवल आसान बल्कि हर प्लेटफॉर्म पर समान रूप से लागू हो और लोगों के लिए सुविधाजनक हो।
सीतारमण ने यह भी कहा कि वर्तमान में लागू केवाईसी प्रक्रिया नागरिकों के लिए समस्याएं उत्पन्न करती है, क्योंकि उन्हें बार-बार अलग-अलग जगहों पर वही दस्तावेज और जानकारी देनी पड़ती है। उन्होंने इस प्रक्रिया को जल्दी और प्रभावी बनाने के लिए फाइनेंशियल स्टेबिलिटी एंड डेवलपमेंट काउंसिल और अन्य नियामकों के साथ मिलकर एक साझा सिस्टम विकसित करने की बात की।
वित्त मंत्री ने जोर देते हुए कहा कि तेजी से बदलते हुए वित्तीय बाजार में नियमों में बदलाव बेहद जरूरी हो गया है। उन्होंने यह भी बताया कि भविष्य में नियमों को केवल समस्याओं के आने के बाद नहीं बल्कि पहले से ही संभावित जोखिमों को ध्यान में रखते हुए तैयार किया जाना चाहिए। इसके साथ ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के गलत उपयोग, अंतरराष्ट्रीय वित्तीय धोखाधड़ी और बढ़ते साइबर खतरों को भी एक बड़ी चुनौती बताया।
सीतारमण ने कहा कि अगले समय में नियमों को ज्यादा सख्त और जटिल बनाने के बजाय सिद्धांतों पर आधारित होना चाहिए ताकि नवाचार को बढ़ावा मिल सके और निवेशकों के हित सुरक्षित रहें। उन्होंने सुझाव दिया कि नए नियमों की तैयारियों में जनता से राय ली जाए ताकि एक संतुलित और लचीला सिस्टम तैयार किया जा सके।
इससे पहले, वित्त मंत्री ने भारत की मजबूत आर्थिक स्थिति और बढ़ते विदेशी मुद्रा भंडार के बारे में बात करते हुए कहा था कि यह भारतीय रिजर्व बैंक को नीतियों में ज्यादा लचीलापन देने की क्षमता प्रदान करता है। उन्होंने यह भी बताया कि भारत सरकार के पास अपनी आर्थिक क्षमता को बढ़ावा देने के लिए पर्याप्त संसाधन हैं।








