संयुक्त राष्ट्र, 25 अप्रैल।
चेरनोबिल परमाणु हादसे की 40वीं बरसी के अवसर पर संयुक्त राष्ट्र महासभा ने दुनिया से परमाणु तकनीक के शांतिपूर्ण उपयोग को सुनिश्चित करने की अपील की है और इसके सुरक्षित संचालन पर जोर दिया है।
एक विशेष स्मृति बैठक के दौरान महासभा अध्यक्ष ने कहा कि चेरनोबिल की भयावहता यह स्पष्ट करती है कि परमाणु तकनीक, भले ही शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए क्यों न हो, अन्य तकनीकों से पूरी तरह भिन्न और अत्यंत संवेदनशील होती है।
26 अप्रैल 1986 को चेरनोबिल परमाणु ऊर्जा संयंत्र में चौथे रिएक्टर में हुए विस्फोटों की श्रृंखला ने इतिहास की सबसे बड़ी परमाणु दुर्घटनाओं में से एक को जन्म दिया था, जिसके कारण यूक्रेन, बेलारूस और यूरोप के कई हिस्सों में रेडियोधर्मी प्रदूषण फैल गया था।
इस हादसे में आठ मिलियन से अधिक लोग विकिरण के संपर्क में आए, हजारों लोगों की मौत हुई और कई बच्चों को ल्यूकेमिया सहित गंभीर बीमारियों का सामना करना पड़ा, जिससे उनका जीवन लंबे समय तक प्रभावित रहा।
महासभा अध्यक्ष ने कहा कि इस त्रासदी की 40वीं वर्षगांठ पर यह आवश्यक है कि परमाणु तकनीक का उपयोग केवल शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए किया जाए और इसके लिए सख्त अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मानकों, कानूनों के पालन तथा अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के सहयोग को सुनिश्चित किया जाए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न हों।
संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने इसे इतिहास की सबसे बड़ी परमाणु दुर्घटना बताया और कहा कि इस त्रासदी ने यह भी दिखाया कि आपदा के समय मानवता का सहयोग और राहत कार्य कितनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
उन्होंने कहा कि चेरनोबिल केवल एक देश की त्रासदी नहीं थी, बल्कि यह पूरे अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए एक सबक है कि परमाणु दुर्घटनाओं के परिणाम सीमाओं से परे होते हैं और सभी देशों को मिलकर सुरक्षा संस्कृति को मजबूत करना चाहिए।
संयुक्त राष्ट्र में रूस के उप स्थायी प्रतिनिधि ने भी कहा कि यह दुर्घटना यह सिखाती है कि मानव से गलतियां हो सकती हैं और किसी भी तकनीक का उचित सावधानी के बिना उपयोग खतरनाक परिणाम दे सकता है।










