रायपुर, 30 मार्च।
बारनवापारा वन्यजीव अभयारण्य में काले हिरणों को उनके प्राकृतिक आवास में मुक्त किया गया। ब्लैकबक कंजर्वेशन सेंटर से कुल 34 हिरणों को वैज्ञानिक विधि से दो चरणों में छोड़कर प्राकृतिक विचरण की सुविधा दी गई। इस वर्ष कुल 60 हिरणों के पुनर्स्थापन का लक्ष्य निर्धारित है।
हिरणों का स्थानांतरण पूरी तरह वैज्ञानिक तकनीकों के अनुसार किया गया, जिससे वन क्षेत्र में कोई व्यवधान न हो। छोड़े गए हिरण रामपुर ग्रासलैंड में पहले से निवासरत काले हिरणों के साथ मिल गए। अधिकारियों ने बताया कि इस नए समूह से क्षेत्रीय पारिस्थितिकी तंत्र में सकारात्मक बदलाव आएगा और वन विभाग आने वाले दिनों में इनकी सतत निगरानी करेगा।
काले हिरण, जो एक समय छत्तीसगढ़ में विलुप्त हो चुके थे, अब इस पुनर्स्थापन अभियान से अपने प्राकृतिक आवास में सुरक्षित रूप से विचरण कर सकेंगे। बारनवापारा अभयारण्य में यह अभियान मुख्य वन संरक्षक अरुण पांडे के मार्गदर्शन और वन्यप्राणी विशेषज्ञ सतोविशा समझदार के नेतृत्व में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।
इस संरक्षण कार्य में वनमंडलाधिकारी धम्मशील गणवीर के सक्रिय प्रयास शामिल रहे। साथ ही अधीक्षक कृषाणु चंद्राकर, परिक्षेत्र अधिकारी कविता ठाकुर, सूर्यप्रकाश जाधव, सहायक परिक्षेत्र अधिकारी गीतेश बंजारे, फील्ड बायोलॉजिस्ट सौरव मेहरा और पशु चिकित्सक जयकिशोर जड़िया सहित अभयारण्य का संपूर्ण स्टाफ मौजूद रहा।
यह अभियान न केवल काले हिरणों के जीवन की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि यह क्षेत्रीय जैव विविधता और पारिस्थितिकी संतुलन को भी मजबूत करेगा।












