जयपुर, 20 मार्च 2026।
राजस्थान हाईकोर्ट में राज्य सरकार ने प्रदेश की सरकारी स्कूलों की जर्जर इमारतों से जुड़े मामले में बताया कि जुलाई माह से पहले सभी स्कूलों का सेफ्टी सर्टिफिकेशन करा लिया जाएगा। अदालत ने कहा कि यदि सर्टिफिकेट गलत मिला तो कार्रवाई की जाएगी। साथ ही अदालत ने मौखिक टिप्पणी में कहा कि आम आदमी 25 लाख रुपए में मकान बना लेता है, लेकिन सरकार बनाती है तो डेढ़ करोड़ रुपए खर्च हो जाते हैं। अदालत ने यह भी कहा कि सरकार को देखना चाहिए कि लोगों को सहयोग के लिए कैसे जोड़ा जा सकता है।
जस्टिस महेन्द्र गोयल और जस्टिस अशोक कुमार जैन की खंडपीठ ने स्वप्रेरित प्रसंज्ञान पर सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी दी। सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि एक शिक्षक ने बताया कि रकूल में रिकॉर्ड रखने के लिए अलमारी नहीं है, लेकिन सहयोग से अलमारी का प्रबंध हो गया। अदालत ने कहा कि इच्छाशक्ति हो तो सब कुछ संभव है और राज्य सरकार स्कूलों की सूची सार्वजनिक करे तो मददगार अपने आप सामने आ जाएंगे।
खंडपीठ ने पहले भी स्पष्ट किया था कि कोई भी स्कूल बिना सेफ्टी ऑडिट के नहीं चलेगा। इस पर कमेटी बनाने का सुझाव आया, लेकिन खंडपीठ ने कहा कि एक लाख स्कूलों में कमेटी नहीं भेजी जा सकती।
सुनवाई में एजी राजेन्द्र प्रसाद ने कहा कि नेशनल एजुकेशन पॉलिसी में कमेटी बनाने का प्रावधान है और उसी के तहत काम किया जाएगा। अदालत ने जुलाई आने के मद्देनजर कहा कि स्कूलों की रंगाई-पुताई हो और वे सुरक्षित हों। एजी ने जवाब दिया कि जुलाई से पहले स्कूलों का सेफ्टी सर्टिफिकेशन कर लिया जाएगा।
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने नए भवनों की जानकारी, कमरों की मरम्मत, नए कमरों का निर्माण, शौचालय बनाने और अगले साल 859 स्कूल भवन बनाने की जानकारी भी दी।












