रायगढ़, 27 मार्च 2026।
रामनवमी के पावन अवसर पर रायगढ़ जिले में प्रशासन और पुलिस की तत्परता से एक नाबालिग बालिका का विवाह होने से रोक दिया गया। सूचना मिली थी कि शहरी क्षेत्र में 16 वर्षीय बालिका का विवाह कराया जा रहा है, जिसे देखते हुए महिला एवं बाल विकास विभाग, पुलिस और चाइल्ड हेल्पलाइन की संयुक्त टीम तुरंत मौके पर पहुंची।
टीम ने विवाह स्थल पर जाकर पाया कि बारात की तैयारी पूरी हो चुकी थी और विवाह समारोह शुरू होने ही वाला था। अधिकारियों ने तुरंत हस्तक्षेप करते हुए विवाह रोक दिया और बालिका की आयु संबंधी दस्तावेजों की जांच की।
सत्यापन में यह सामने आया कि बालिका की उम्र केवल 16 वर्ष 05 माह 13 दिन है, जो कानूनी न्यूनतम वैवाहिक आयु 18 वर्ष से कम है। इसके आधार पर प्रशासन ने विवाह रुकवाते हुए स्पष्ट किया कि बाल विवाह कानूनन अपराध है।
कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी के निर्देश पर इस कार्रवाई को अंजाम दिया गया। मौके पर अधिकारियों ने परिजनों को बाल विवाह के दुष्परिणाम और कानूनी प्रावधानों के बारे में जानकारी दी।
प्रशासनिक टीम ने परिजनों से लिखित शपथ पत्र लिया, जिसमें उन्होंने आश्वासन दिया कि बालिका के 18 वर्ष की आयु पूरी होने से पहले उसका विवाह नहीं किया जाएगा। सामुदायिक भवन संचालक को भी निर्देश दिए गए कि भवन किराए पर देने से पहले वर-वधु के आयु प्रमाण पत्रों का सत्यापन अनिवार्य किया जाए।
इस कार्रवाई में जिला बाल संरक्षण अधिकारी, विधिक सह-परिवीक्षा अधिकारी, सेक्टर पर्यवेक्षक, चाइल्ड हेल्पलाइन परियोजना समन्वयक, पुलिस आरक्षक और वार्ड पार्षद की सक्रिय भागीदारी रही, जिससे बालिका को समय रहते बाल विवाह से बचाया जा सका।
जिला प्रशासन ने कहा कि बाल विवाह गंभीर सामाजिक बुराई और दंडनीय अपराध है। नागरिकों से अपील की गई है कि बाल विवाह की जानकारी मिलने पर तुरंत चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 या नजदीकी प्रशासनिक कार्यालय को सूचित करें।




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