सागर, 18 अप्रैल
बुंदेलखंड की पारंपरिक ‘अखाड़ा’ कला को वैश्विक पहचान दिलाने वाले पद्मश्री से सम्मानित भगवानदास रैकवार ‘दाऊ’ का शनिवार को निधन हो गया। वे पिछले कुछ दिनों से अस्वस्थ थे और भोपाल स्थित एम्स में उपचार के दौरान उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर मिलते ही क्षेत्र में शोक का माहौल फैल गया।
परिवार की ओर से मिली जानकारी के अनुसार, वे वेंटिलेटर पर थे और लगातार जीवन के लिए संघर्ष कर रहे थे। अंततः शनिवार को उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया। उनके निधन से कला और समाज सेवा से जुड़े लोगों में गहरी पीड़ा देखी जा रही है।
बुंदेलखंड की सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाने में उनका योगदान उल्लेखनीय रहा है। उन्होंने अपने जीवन को समाज सेवा और पारंपरिक कलाओं के संरक्षण के लिए समर्पित किया। उनके इसी समर्पण को देखते हुए उन्हें वर्ष 2026 में पद्मश्री सम्मान से अलंकृत किया गया था, जो पूरे सागर जिले के लिए गर्व का विषय बना।
सागर विधायक शैलेंद्र जैन ने उनके निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि भगवानदास रैकवार का जाना समाज के लिए एक बड़ी क्षति है, जिसे भर पाना संभव नहीं है। उन्होंने उनके जीवन को सेवा, समर्पण और प्रेरणा का प्रतीक बताते हुए कहा कि उनके कार्य हमेशा याद किए जाएंगे।
उन्होंने ईश्वर से दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करते हुए शोक संतप्त परिवार को इस कठिन समय में धैर्य प्रदान करने की कामना की।
भगवानदास रैकवार के निधन से न केवल रैकवार समाज बल्कि पूरे बुंदेलखंड क्षेत्र ने अपना एक मार्गदर्शक खो दिया है। उनके जाने से कला और सामाजिक क्षेत्र में एक बड़ा शून्य उत्पन्न हो गया है, जिसकी भरपाई कर पाना कठिन माना जा रहा है।










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