संपादकीय
18 Apr, 2026

सत्ता के साये में अपराध पनपें, तो सुशासन सवालों के घेरे में

मध्य प्रदेश में बढ़ते अपराध और कथित राजनीतिक संरक्षण से सुशासन पर सवाल उठे हैं। कानून-व्यवस्था, प्रशासनिक जवाबदेही और निष्पक्ष कार्रवाई को लेकर गंभीर चिंताएं व्यक्त की गई हैं।

18 अप्रैल।

मध्य प्रदेश इन दिनों एक विचलित करने वाले दौर से गुजरता प्रतीत हो रहा है। लगातार सामने आ रही आपराधिक घटनाएं न केवल कानून-व्यवस्था पर सवाल उठा रही हैं, बल्कि उस “सुशासन” की अवधारणा को भी चुनौती दे रही हैं, जिसका दावा सरकार बार-बार करती रही है। स्थिति तब और गंभीर हो जाती है, जब इन घटनाओं में कथित तौर पर सत्ताधारी दल से जुड़े व्यक्तियों या उनके समर्थकों के नाम उभरकर सामने आते हैं।
ग्वालियर-चंबल संभाग में हाल ही में हुई निर्मम घटनाएं, जिनमें लोगों को वाहन से कुचलने जैसी अमानवीय वारदात शामिल है, समाज को भीतर तक झकझोर देती हैं। वहीं, एक जनप्रतिनिधि पर लगे गंभीर आरोप यह संकेत देते हैं कि कहीं न कहीं सत्ता के करीब होने का अहसास कानून के डर को कम कर रहा है। यह प्रवृत्ति यदि समय रहते नहीं रोकी गई, तो यह लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए खतरनाक संकेत साबित हो सकती है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव लगातार सुशासन, पारदर्शिता और विकास की बात करते रहे हैं। उनके नेतृत्व में सरकार ने कई योजनाएं और पहलें शुरू की हैं, जिनका उद्देश्य प्रदेश को एक बेहतर दिशा में ले जाना है। इसी तरह भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल संगठन को जनसेवा और अनुशासन के आधार पर मजबूत करने की बात करते हैं। लेकिन जमीनी हकीकत इन प्रयासों के समानांतर एक अलग कहानी कहती नजर आ रही है।
वन रक्षक पर ट्रैक्टर चढ़ाने की घटना ने न केवल प्रशासनिक सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े किए, बल्कि यह भी दर्शाया कि सरकारी कर्तव्यों का निर्वहन करने वाले कर्मचारी भी सुरक्षित नहीं हैं। यदि ऐसे मामलों में आरोपियों के राजनीतिक संबंधों की चर्चा सामने आती है, तो यह स्वाभाविक है कि जनता के मन में निष्पक्षता को लेकर संदेह उत्पन्न हो।
यहां यह समझना जरूरी है कि किसी भी सरकार की असली ताकत उसकी नीतियों में नहीं, बल्कि उनके क्रियान्वयन में होती है। और क्रियान्वयन का सबसे महत्वपूर्ण आधार है कानून का समान रूप से पालन। यदि सत्ता से जुड़े लोगों को विशेष संरक्षण मिलने की धारणा बनती है, तो यह न केवल शासन की विश्वसनीयता को कमजोर करता है, बल्कि समाज में असंतोष और असुरक्षा की भावना को भी बढ़ाता है।
इस परिप्रेक्ष्य में राज्य सरकार और संगठन दोनों के सामने एक बड़ी चुनौती है—अपने ही तंत्र में अनुशासन और जवाबदेही सुनिश्चित करना। यह समय केवल बयान देने का नहीं, बल्कि कठोर और निष्पक्ष कार्रवाई का है। दोषी चाहे कोई भी हो, यदि उसके खिलाफ त्वरित कार्रवाई होती है, तो यह एक मजबूत संदेश जाएगा कि कानून सबके लिए समान है।
विपक्ष की भूमिका भी यहां महत्वपूर्ण हो जाती है, लेकिन उसे भी इस मुद्दे को केवल राजनीतिक अवसर के रूप में नहीं, बल्कि जनहित के मुद्दे के रूप में उठाना चाहिए। समाज के हर वर्ग को यह भरोसा दिलाना जरूरी है कि न्याय व्यवस्था निष्पक्ष है और किसी भी प्रकार का राजनीतिक दबाव उस पर हावी नहीं हो सकता।
सुशासन केवल एक नारा नहीं, बल्कि एक निरंतर प्रक्रिया है, जिसे हर स्तर पर ईमानदारी और दृढ़ता के साथ लागू करना होता है। यदि सत्ता के साये में अपराध पनपने लगें, तो यह संकेत है कि कहीं न कहीं व्यवस्था में सुधार की आवश्यकता है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और प्रदेश नेतृत्व के लिए यह एक अवसर भी है—अपनी प्रतिबद्धता को साबित करने का और यह दिखाने का कि मध्य प्रदेश में कानून का राज सर्वोपरि है।
जनता की अपेक्षाएं स्पष्ट हैं—न्याय, सुरक्षा और समानता। अब यह सरकार और व्यवस्था पर निर्भर है कि वह इन अपेक्षाओं पर कितना खरा उतरती है।
|
आज का राशिफल

इस सप्ताह आपके लिए अनुकूल समय है। पेशेवर मोर्चे पर सफलता मिलने के योग हैं। व्यक्तिगत जीवन में भी सुकून और संतोष रहेगा।
भाग्यशाली रंग: लाल
भाग्यशाली अंक: 9
मंत्र: "ॐ हं राम रामाय नमः"

आज का मौसम

भोपाल

23° / 41°

SUNNY

ट्रेंडिंग न्यूज़