भोपाल, 25 मई ।
मध्यप्रदेश में न्यूनतम समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदी का अभियान तेज गति से जारी है और अब तक प्रदेश देश में प्रथम स्थान पर पहुंच गया है, जहां 13 लाख 27 हजार किसानों से लगभग 102 लाख मीट्रिक टन गेहूं का उपार्जन किया जा चुका है, जबकि खरीदी प्रक्रिया अभी भी निरंतर जारी है।
खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री ने बताया कि कोविड अवधि को छोड़कर पिछले दस वर्षों में यह वर्ष समर्थन मूल्य पर गेहूं उपार्जन के लिहाज से सर्वाधिक रहा है और मुख्यमंत्री के प्रयासों से केंद्र सरकार ने उपार्जन लक्ष्य 78 लाख मीट्रिक टन से बढ़ाकर 100 लाख मीट्रिक टन कर दिया है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में उपार्जन कार्य की सतत निगरानी की जा रही है और मुख्यमंत्री स्वयं खरीदी केंद्रों का निरीक्षण कर तौल व्यवस्था, बारदाने की उपलब्धता तथा किसानों को दी जा रही सुविधाओं की समीक्षा कर रहे हैं।
उन्होंने यह भी बताया कि जिन किसानों ने स्लॉट बुक कर लिए हैं, उनके लिए उपार्जन की अवधि 23 मई से बढ़ाकर 28 मई कर दी गई है, ताकि सभी किसानों को सुविधा मिल सके और किसी को परेशानी न हो।
किसानों को अब तक उपार्जित गेहूं के एवज में 22,165.21 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान किया जा चुका है। साथ ही प्रत्येक उपार्जन केंद्र पर तौल काटों की संख्या बढ़ाई गई है तथा तौल पर्ची बनाने और देयक जारी करने का समय भी देर रात तक बढ़ाया गया है।
प्रदेश में उपार्जन व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए सप्ताह में छह दिन खरीदी की जा रही है तथा केंद्रों पर पेयजल, छायादार बैठने की व्यवस्था सहित अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। किसानों को 2585 रुपये प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य और 40 रुपये प्रति क्विंटल राज्य बोनस सहित कुल 2625 रुपये प्रति क्विंटल की दर से भुगतान किया जा रहा है। भंडारण व्यवस्था को भी सुदृढ़ किया गया है।
इसके अलावा उपार्जन केंद्रों पर बारदाने, तौल काटे, हम्माल, तुलावटी, सिलाई मशीन, कंप्यूटर, गुणवत्ता परीक्षण उपकरण तथा सफाई व्यवस्था के लिए पंखा एवं छन्ना जैसी सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई हैं।






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