कोलकाता, 11 जून।
पश्चिम बंगाल की राजनीति में 'सिग्नेचर फर्जीवाड़ा' मामला एक बड़े आंतरिक विवाद का कारण बन गया है। तृणमूल कांग्रेस के दो कद्दावर नेताओं—सांसद अभिषेक बनर्जी और वरिष्ठ अधिवक्ता व सांसद कल्याण बनर्जी—के बीच मतभेद इस कदर बढ़ गए हैं कि कल्याण बनर्जी ने अभिषेक बनर्जी का कानूनी पक्ष रखने से इनकार कर दिया है।
अदालत में मामले की सुनवाई से ठीक पहले कल्याण बनर्जी ने खुद को और अपनी पूरी कानूनी टीम (जिसमें उनके पुत्र शीर्षण्य बनर्जी भी शामिल थे) को इस केस से अलग कर लिया। कल्याण बनर्जी ने आरोप लगाया कि उन्हें अंधेरे में रखा गया और अंतिम समय में अयन भट्टाचार्य को पैरवी के लिए नियुक्त कर दिया गया। 45 वर्षों के अनुभव वाले कल्याण बनर्जी ने इस व्यवहार को अपमानजनक बताया और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के समक्ष एक अल्टीमेटम रख दिया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, "ममता बनर्जी या तो अभिषेक को रखें या हमें।" उन्होंने अभिषेक बनर्जी पर पार्टी को नुकसान पहुंचाने का गंभीर आरोप भी लगाया है।
इस बीच, कलकत्ता हाई कोर्ट ने राहत और कानूनी संरक्षण की मांग करने वाले अभिषेक बनर्जी को सीआईडी की जांच में सहयोग करने का निर्देश दिया है। न्यायमूर्ति कौशिक चंद्र की खंडपीठ ने उन्हें गुरुवार शाम 6 बजे तक सीआईडी मुख्यालय 'भवानी भवन' में पूछताछ के लिए उपस्थित होने को कहा है। हालांकि, कोर्ट ने जांच एजेंसी को अगले दो सप्ताह तक अभिषेक बनर्जी के खिलाफ कोई भी 'कठोर कार्रवाई' न करने का आदेश दिया है। अब सभी की नजरें कल शाम भवानी भवन में होने वाली पूछताछ पर टिकी हैं।










