जयपुर, 12 जून।
गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने कहा कि समय रहते यदि समाज और किसान प्राकृतिक खेती तथा रासायनिक खेती के दुष्प्रभावों को लेकर जागरूक नहीं हुए तो आने वाली पीढ़ियां इसे कभी स्वीकार नहीं करेंगी। उन्होंने कहा कि आज की स्थिति में हम खेती नहीं बल्कि नुकसान का मार्ग अपना रहे हैं और प्राकृतिक खेती ही कृषि एवं स्वास्थ्य का सुरक्षित भविष्य है।
उन्होंने कहा कि किसान वास्तव में “राजाओं का राजा” है, क्योंकि वह पूरे समाज के लिए अन्न उत्पादन करता है। आचार्य देवव्रत ने हरित क्रांति के दौरान दी गई नाइट्रोजन की सीमित मात्रा की सिफारिश का उल्लेख करते हुए कहा कि आज कई क्षेत्रों में अत्यधिक मात्रा में यूरिया का उपयोग हो रहा है, जिससे मिट्टी की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है।
कार्यशाला को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि लगातार रासायनिक खेती के कारण भूमि में ऑर्गेनिक कार्बन का स्तर गंभीर रूप से घटा है। उन्होंने बताया कि सूक्ष्म जीव और मित्र कीट मिट्टी को उपजाऊ बनाते हैं, और प्राकृतिक खेती से उत्पादन में कमी नहीं बल्कि वृद्धि होती है।
उन्होंने यह भी कहा कि वे स्वयं बिना कीटनाशक के प्राकृतिक तरीके से खेती करते हैं और इससे बेहतर उत्पादन प्राप्त होता है। महर्षि दयानंद सरस्वती के विचारों का उल्लेख करते हुए उन्होंने किसान को समाज का आधार बताया और कहा कि किसान का श्रम सबसे बड़ी सेवा है।
इस अवसर पर राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े ने किसानों से अपील की कि वे रसायन मुक्त उत्पादन करें ताकि आमजन को स्वास्थ्य लाभ मिल सके। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि प्रदेश में प्राकृतिक खेती, पंचगव्य, जीवामृत, बीजामृत और मल्चिंग जैसी पद्धतियों को बढ़ावा दिया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि राज्य सरकार जल और ऊर्जा उपलब्धता बढ़ाने के लिए कई परियोजनाओं पर कार्य कर रही है तथा वर्ष 2027 तक किसानों को दिन में बिजली उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है। साथ ही किसानों को पारंपरिक खेती के लिए प्रोत्साहन राशि भी दी जा रही है।
भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ ने कहा कि कीटनाशकों का अधिक उपयोग गंभीर बीमारियों का कारण बन रहा है, इसलिए किसानों को प्राकृतिक खेती अपनानी चाहिए। वहीं भाजपा किसान मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष कैलाश चौधरी ने कहा कि प्रधानमंत्री का लक्ष्य देश में पोषणयुक्त अन्न उत्पादन को बढ़ावा देना है।
कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री, उपमुख्यमंत्री, संगठन पदाधिकारी, सांसद, विधायक एवं बड़ी संख्या में किसान मौजूद रहे। इस दौरान प्राकृतिक खेती पर आधारित प्रदर्शनी और लघु नाटिका का भी आयोजन किया गया।













