नई दिल्ली, 12 जून।
मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने पुष्टि की है कि भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में अल नीनो की स्थिति विकसित हो चुकी है, जो आगामी दक्षिण-पश्चिम मानसून के दौरान और अधिक मजबूत हो सकती है। विभाग के अनुसार समुद्री सतह के तापमान में बढ़ोतरी के चलते यह जलवायु स्थिति स्पष्ट रूप से सक्रिय दिखाई दे रही है।
आईएमडी के जून बुलेटिन में बताया गया है कि मध्य और पूर्वी प्रशांत महासागर में समुद्र की सतह का तापमान अब उस सीमा को पार कर चुका है, जो अल नीनो की स्थिति के लिए आवश्यक होती है। इसके प्रभाव अब वायुमंडल में भी दिखाई देने लगे हैं, जिससे समुद्र और वायुमंडल की संयुक्त प्रणाली में इसके संकेत स्पष्ट हो रहे हैं।
मौसम पूर्वानुमान मॉडल्स के अनुसार मानसून सीजन के दौरान अल नीनो और अधिक तीव्र हो सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह स्थिति भारत में मानसूनी वर्षा को प्रभावित कर सकती है और कई बार सामान्य से कम बारिश का कारण भी बन सकती है।
वहीं, हिंद महासागर द्विध्रुव (आईओडी) की स्थिति फिलहाल तटस्थ बनी हुई है और पूरे मानसून सीजन में इसके इसी स्थिति में बने रहने की संभावना जताई गई है।
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार अल नीनो और आईओडी जैसे जलवायु कारक मानसून की दिशा और वितरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इनकी लगातार निगरानी आवश्यक है, क्योंकि इनसे कृषि उत्पादन और वर्षा पैटर्न पर सीधा प्रभाव पड़ सकता है।
उल्लेखनीय है कि अल नीनो एक प्राकृतिक और चक्रीय जलवायु घटना है, जिसमें प्रशांत महासागर के मध्य और पूर्वी भागों में समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से अधिक हो जाता है, जिससे वैश्विक मौसम प्रणाली प्रभावित होती है।













