काठमांडू, 13 जून।
नेपाल में अपने हक की लड़ाई को लेकर शनिवार को प्रशिक्षु डॉक्टरों ने सड़कों पर उतरकर बड़ा प्रदर्शन किया। काठमांडू के माइतीघर मंडला में जमा हुए इन चिकित्सकों ने बेहतर कार्यस्थल, श्रम अधिकार और उचित सुविधाओं की मांग सरकार के सामने रखी।
प्रदर्शन के दौरान डॉक्टरों ने "जेनजी सरकार, जेनजी डॉक्टरों को न्याय दो" जैसे नारे लगाए। उन्होंने एक सात सूत्री मांगपत्र सौंपकर सरकार, नेपाल चिकित्सा परिषद और अन्य संबंधित निकायों से अविलंब सुधार की अपील की।
आंदोलनकारी डॉक्टरों का कहना है कि ड्यूटी का समय नेपाल श्रम अधिनियम-2074 के दायरे में होना चाहिए। उन्होंने प्रतिदिन काम के घंटे 12 और सप्ताह में 72 से अधिक न रखने की बात कही है। साथ ही, सप्ताह में एक दिन अनिवार्य अवकाश की मांग प्रमुखता से उठाई गई।
महिला स्वास्थ्यकर्मियों के प्रति संवेदनशीलता दिखाते हुए उन्होंने समान वेतन और कानून के तहत मातृत्व अवकाश की मांग की है। मातृत्व अवकाश के बाद भी प्रशिक्षण और पढ़ाई जारी रखने की स्पष्ट व्यवस्था की जाए, ताकि उनका करियर बाधित न हो।
डॉक्टरों ने वेतन और भत्तों पर भी सवाल खड़े किए हैं। रेजिडेंट डॉक्टरों को आठवें स्तर और इंटर्न डॉक्टरों को छठे स्तर के अनुरूप पारिश्रमिक देने की बात कही गई। इसके अलावा, तय सीमा से अधिक काम करने पर ओवरटाइम भत्ता अनिवार्य करने की मांग की गई है।
प्रदर्शनकारियों ने मौजूदा व्यवस्था को युवा डॉक्टरों के साथ बड़ा अन्याय करार दिया। उन्होंने चेतावनी दी कि मानसिक स्वास्थ्य, उचित मेहनताना और अध्ययन के अनुकूल माहौल बनाने के लिए सरकार को फौरन ठोस कदम उठाने होंगे।















