रांची, 15 जून।
बोकारो के बहुचर्चित तेतुलिया जमीन विवाद मामले में झारखंड उच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण निर्णय सुनाते हुए जांच की न्यायिक निगरानी की मांग को सिरे से खारिज कर दिया है। मुख्य न्यायाधीश एम. एस. सोनक और न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि केवल अनुमानों के आधार पर जांच एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर संदेह करना उचित नहीं है। अदालत के अनुसार, वर्तमान स्थिति में जांच प्रक्रिया में किसी भी प्रकार का न्यायिक हस्तक्षेप आवश्यक नहीं है।
सुनवाई के दौरान अदालत ने याचिकाकर्ता के उन दावों को नकार दिया, जिनमें जांच एजेंसियों द्वारा आरोपियों को लाभ पहुंचाने की आशंका जताई गई थी। न्यायालय ने कहा कि एजेंसियों को अपना काम पूरी स्वायत्तता के साथ करने का अवसर दिया जाना चाहिए। खंडपीठ ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और सीआईडी को कड़े निर्देश दिए हैं कि वे कानून के दायरे में रहकर पूरी पारदर्शिता के साथ जांच को उसके अंतिम निष्कर्ष तक पहुंचाएं।
यह मामला 103 एकड़ वनभूमि की खरीद-बिक्री में कथित अनियमितताओं से जुड़ा है। अदालत ने अपने आदेश में साफ कर दिया कि जब तक जांच को प्रभावित करने संबंधी कोई ठोस सबूत सामने नहीं आते, तब तक अदालती हस्तक्षेप की कोई गुंजाइश नहीं है।















