अहमदाबाद, 15 जून।
12 जून 2025 को अहमदाबाद से लंदन के लिए उड़ी एयर इंडिया की फ्लाइट एआई-171 टेकऑफ के महज 32 सेकंड बाद काल बन गई। 242 यात्रियों और क्रू सदस्यों में से 241 तथा जमीन पर 19 लोगों सहित कुल 260 बेगुनाहों की जान चली गई। हादसे की पहली बरसी पर परिजनों के हाथों में फूल हैं, आंखों में आंसू हैं और जुबान पर एक ही सवाल है - आखिर उनका अपना क्यों मरा? दुखद यह है कि नागर विमानन मंत्रालय और विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (एएआईबी) के पास एक साल बाद भी कोई स्पष्ट जवाब नहीं, केवल "जांच जारी है" का घिसा-पिटा आश्वासन है।
260 परिवार आज भी सच का इंतजार कर रहे हैं। श्रद्धांजलि सभाओं से जख्म नहीं भरते, जख्म सच और जवाबदेही से भरते हैं। एएआईबी की प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार उड़ान भरते ही बोइंग 787-8 ड्रीमलाइनर के दोनों इंजन के फ्यूल स्विच रन से कटऑफ पर चले गए। कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर में एक पायलट दूसरे से पूछता है, "क्या तुमने स्विच बंद किया?" जवाब मिलता है, "नहीं।" इसके बाद तीन बार मेडे कॉल दी गई, लेकिन विमान मेडिकल कॉलेज के हॉस्टल पर जा गिरा।
सवाल यह है कि दोनों फ्यूल स्विच एक साथ कैसे बंद हुए? तकनीकी खराबी थी, रखरखाव में चूक थी या मानवीय भूल? ब्लैक बॉक्स का डेटा मिलने के बावजूद अंतिम रिपोर्ट अब तक सार्वजनिक क्यों नहीं हुई? अंतरराष्ट्रीय नियमों के अनुसार एक वर्ष के भीतर अंतिम रिपोर्ट या कम से कम विस्तृत अंतरिम रिपोर्ट जारी होनी चाहिए, लेकिन अब तक केवल अटकलें ही सामने आई हैं।
सरकार ने मुआवजा दिया है, पर परिजनों को धन नहीं, सच चाहिए। अब समय लीपापोती का नहीं, जवाबदेही का है। एएआईबी को स्पष्ट करना होगा कि हादसे का वास्तविक कारण क्या था, किसकी जिम्मेदारी थी और भविष्य में ऐसी त्रासदी रोकने के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे। यदि आवश्यकता हो तो अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ एजेंसियों की मदद ली जाए। 260 मौतों का सच फाइलों की धूल में दबा नहीं रहना चाहिए।














