देहरादून, 15 जून।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोमवार को खेती-किसानी के प्रति अपने समर्पण को प्रदर्शित करते हुए अपने निजी आवास, नगला तराई के खेतों में श्रमदान किया। मुख्यमंत्री ने स्वयं टिलर चलाकर खेत की जुताई की और पारंपरिक विधि से गोबर की खाद का उपयोग कर जैविक खेती का संदेश दिया। इस अवसर पर उनकी माता बिशना देवी भी उनके साथ खेतों में मौजूद रहीं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कृषि केवल एक पेशा नहीं, बल्कि भारत की ग्रामीण अर्थव्यवस्था और संस्कृति की आधारशिला है। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीकी उपकरणों के साथ-साथ प्राकृतिक खाद और पारंपरिक पद्धतियों को अपनाकर कृषि को अधिक टिकाऊ बनाया जा सकता है। उन्होंने रासायनिक उर्वरकों के दुष्प्रभावों पर चिंता जताते हुए किसानों को जैविक खेती की ओर प्रेरित होने का आह्वान किया।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार किसानों की आय में वृद्धि करने और स्थानीय जैविक उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने युवा पीढ़ी से भी कृषि और ग्रामीण विकास की मुख्यधारा से जुड़ने की अपील की। मुख्यमंत्री के इस कार्य की सराहना करते हुए इसे राज्य की कृषि नीति को प्रोत्साहित करने वाला कदम बताया जा रहा है।















