राजनीति
17 Jun, 2026

केंद्र के सुशासन मॉडल अपनाएं राज्य, विकसित भारत के लक्ष्य को मिलेगी गति : जितेंद्र सिंह

केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने राज्यों से केंद्र की सफल डिजिटल और प्रशासनिक व्यवस्थाओं को अपनाने की अपील करते हुए कहा कि इससे सुशासन मजबूत होगा और विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को गति मिलेगी।

नई दिल्ली, 17 जून।

केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने राज्यों से केंद्र सरकार द्वारा विकसित सफल प्रशासनिक और डिजिटल शासन मॉडलों को अपनाने का आग्रह किया है। उन्होंने कहा कि केंद्र की कई पहलें सुशासन की प्रभावी मिसाल बन चुकी हैं और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी उनकी सराहना हुई है। इन व्यवस्थाओं को राज्यों में लागू कर विकसित भारत 2047 के लक्ष्य की दिशा में तेजी से आगे बढ़ा जा सकता है।

बुधवार को कर्तव्य भवन में आयोजित पत्रकार वार्ता में डॉ. सिंह ने कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन मंत्रालय की 12 वर्षों की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में शासन व्यवस्था में व्यापक परिवर्तन देखने को मिला है। उनके अनुसार प्रशासनिक सुधार अब केवल प्रक्रियात्मक बदलाव तक सीमित नहीं हैं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक बदलाव के महत्वपूर्ण माध्यम बन गए हैं।

उन्होंने कहा कि मिशन कर्मयोगी, डिजिटल लाइफ सर्टिफिकेट, ई-ऑफिस और अन्य तकनीक आधारित प्रणालियों ने प्रशासन को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और नागरिक-केंद्रित बनाया है। इन पहलों से आम लोगों तक सरकारी सेवाओं की पहुंच आसान हुई है और कार्यों के निष्पादन में तेजी आई है।

डॉ. सिंह ने बताया कि वर्ष 2014 में शुरू की गई स्व-प्रमाणन व्यवस्था ने नागरिकों को दस्तावेज सत्यापन के लिए अधिकारियों के चक्कर लगाने से राहत दिलाई। उन्होंने इसे सरकार और नागरिकों के बीच विश्वास को मजबूत करने वाला कदम बताया। इसके साथ ही ग्रुप-बी (गैर राजपत्रित) और ग्रुप-सी पदों पर साक्षात्कार समाप्त करने से भर्ती प्रक्रिया अधिक निष्पक्ष और पारदर्शी बनी है।

भर्ती प्रणाली में सुधारों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि आधार आधारित सत्यापन, कंप्यूटर आधारित परीक्षाएं और नकल रोकने के लिए नए कानूनी प्रावधान लागू किए गए हैं। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय रोजगार मेले के माध्यम से अक्टूबर 2022 से अब तक 19 कार्यक्रमों में 12 लाख से अधिक युवाओं को नियुक्ति पत्र प्रदान किए जा चुके हैं।

उन्होंने कहा कि आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों, दिव्यांगजनों और अन्य वंचित समूहों को सरकारी नौकरियों में बेहतर अवसर उपलब्ध कराने के लिए भी कई कदम उठाए गए हैं, जिससे सरकारी सेवाओं में समावेशिता को बढ़ावा मिला है।

मिशन कर्मयोगी का उल्लेख करते हुए मंत्री ने इसे दुनिया के सबसे बड़े सिविल सेवा सुधार कार्यक्रमों में से एक बताया। उन्होंने कहा कि ई-जीओटी कर्मयोगी प्लेटफॉर्म पर 1.65 करोड़ से अधिक अधिकारी और कर्मचारी पंजीकृत हैं तथा करीब 13 करोड़ प्रशिक्षण पाठ्यक्रम पूरे किए जा चुके हैं। अब इस मंच पर कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित सुविधाओं को भी शामिल किया गया है।

पेंशनभोगियों के लिए किए गए सुधारों की चर्चा करते हुए डॉ. सिंह ने कहा कि डिजिटल लाइफ सर्टिफिकेट और फेस रिकग्निशन तकनीक ने वरिष्ठ नागरिकों की कई परेशानियां दूर की हैं। अब उन्हें जीवित प्रमाण पत्र जमा करने के लिए कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ते। इसके अलावा पेंशन अदालत और ऑनलाइन शिकायत निवारण प्रणाली जैसी सुविधाओं से भी लाभ मिल रहा है।

उन्होंने कहा कि पिछले 12 वर्षों में सरकार ने भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने, प्रशासनिक पारदर्शिता बढ़ाने और व्यवस्था को अधिक संवेदनशील बनाने की दिशा में कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। इन प्रयासों से नागरिकों का भरोसा मजबूत हुआ है और सरकारी सेवाओं की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार आया है।

डॉ. सिंह ने विश्वास जताया कि यदि राज्य सरकारें भी इन सफल पहलों को अपनाती हैं तो देश में सुशासन को नई मजबूती मिलेगी और विकसित भारत 2047 का लक्ष्य हासिल करने की प्रक्रिया और तेज होगी।

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