बेरुत, 19 जून।
दक्षिणी लेबनान में अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौते के प्रयासों के बावजूद इसराइली हमला थमने का नाम नहीं ले रहा है। पिछले कुछ घंटों में हुए ताज़ा हवाई हमलों और भीषण जंग में कम से कम 18 लोगों की जान जा चुकी है। इस बीच, ईरान समर्थित हिजबुल्लाह ने भी इस क्षेत्र में जोरदार जवाबी कार्रवाई की पुष्टि की है। लेबनान की राष्ट्रीय समाचार एजेंसी के अनुसार, इस हिंसक गोलाबारी में एक बटालियन कमांडर समेत चार इसराइली सैनिक भी मारे गए हैं।
इस ताजा सैन्य टकराव के कारण स्विट्जरलैंड में अमेरिका और ईरान के बीच होने वाली तकनीकी वार्ता टल गई है। लेबनान पर लगातार हो रहे हमलों के विरोध में ईरान ने अपनी टीम भेजने से साफ इनकार कर दिया। उधर, इसराइल का कहना है कि हिजबुल्लाह के खतरों को खत्म करने के लिए उसका यह सैन्य अभियान और जमीनी कब्जा जारी रहेगा। इस बीच इसराइल के मंत्रियों ने बेहद उग्र बयान देते हुए पूरे लेबनान को मरुस्थल में बदलने की चेतावनी दी है।
इस लेबनान संकट के बीच हिजबुल्लाह ने दावा किया है कि उसने अंदर बढ़ रहे इसराइली टैंकों और सैनिकों को ड्रोन और रॉकेट से निशाना बनाकर उनके चार दिवसीय सैन्य अभियान को रोक दिया है। इधर, अमेरिकी राष्ट्रपति ने सोशल मीडिया पर सभी मोर्चों पर पूर्ण युद्धविराम की उम्मीद जताई है। हालांकि, इसराइल ने एक नया नक्शा जारी किया है जो लेबनानी क्षेत्र में 10 किलोमीटर अंदर तक उसकी सेना की मौजूदगी और समुद्री गैस परियोजना क्षेत्र पर नियंत्रण दिखाता है, जिसे कानूनी विशेषज्ञ पुराने समझौते का उल्लंघन मान रहे हैं।
इस बीच, इसराइल के प्रधानमंत्री पर उनकी ही पार्टी के नेताओं द्वारा अमेरिका के सामने न झुकने और लेबनान पर पूरी ताकत से हमला करने का दबाव बनाया जा रहा है। दूसरी ओर, अमेरिका ने हिजबुल्लाह की मदद करने और शांति प्रक्रिया में बाधा डालने के आरोप में कई लेबनानी अधिकारियों और कंपनियों पर नए प्रतिबंध लगा दिए हैं। लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, 2 मार्च से शुरू हुए इस भीषण युद्ध में अब तक 3,912 लोगों की मौत हो चुकी है और 11,873 लोग घायल हुए हैं।













