रांची, 19 जून।
झारखंड उच्च न्यायालय ने अधिवक्ता महेश तिवारी की उस याचिका पर अपना रुख स्पष्ट किया है, जो उन्होंने सजा स्थगन अर्जी नामंजूर होने के बाद दायर की थी। अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तिवारी को इस पर अपना प्रतिउत्तर पेश करने को कहा है, जिसकी अगली तारीख 25 जून मुकर्रर की गई है।
सुनवाई के दौरान राज्य प्रशासन ने इस याचिका की वैधानिकता पर कड़ा एतराज जताया। सरकार की तरफ से दलील दी गई कि याचिकाकर्ता ने केवल अंतरिम आवेदन खारिज होने के फैसले को चुनौती दी है, जो कानूनी मापदंडों के अनुसार विचार योग्य नहीं मानी जा सकती।
उच्च न्यायालय ने इस आपत्ति को रिकॉर्ड पर लेते हुए महेश तिवारी को अपना पक्ष रखने की मोहलत दी है। इस पूरे मामले में सरकार का पक्ष विशेष लोक अभियोजक विनीत कुमार वशिष्ठ ने अदालत के सामने रखा।
इस विवाद की शुरुआत तब हुई जब रांची सिविल कोर्ट के प्रधान न्यायायुक्त अनिल कुमार मिश्रा की अदालत ने सजा रोकने की मिसलेनियस अपील को ठुकरा दिया था। इसके साथ ही मुख्य मामले की फाइल को आगे की सुनवाई के लिए अपर न्यायायुक्त कुलदीप की कोर्ट में ट्रांसफर कर दिया गया था।
तिवारी ने निचली अदालत के फैसले के खिलाफ सिविल कोर्ट में गुहार लगाई थी। उन्होंने मुख्य अपील के साथ ही सजा पर तुरंत रोक लगाने की भी मांग की थी, परंतु अदालत ने उनकी इस मांग को स्वीकार नहीं किया।
गौरतलब है कि यह पूरा मामला महिला वकील ऋतु कुमार के साथ हाथापाई से जुड़ा हुआ है। इस प्रकरण में न्यायिक दंडाधिकारी की अदालत ने महेश तिवारी को दोषी ठहराते हुए दो साल की जेल की सजा सुनाई थी। इसी दंडात्मक कार्रवाई से राहत पाने के लिए उन्होंने अब ऊपरी अदालत का दरवाजा खटखटाया है।













