मुंबई, 20 जून।
भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने वित्तीय क्षेत्र में बाजार दक्षता बढ़ाने, अनुपालन को आसान बनाने और नियामक ढांचे को मजबूत करने के लिए कई बड़े सुधारों को मंजूरी दी है। मुंबई में आयोजित अपनी 214वीं बैठक में सेबी बोर्ड ने मृत निवेशकों के नाम पर मौजूद प्रतिभूतियों (शेयरों) को उनके कानूनी वारिसों और दावेदारों के नाम पर ट्रांसफर करने की प्रक्रिया को बेहद सरल बना दिया है।
नियामक ने छोटे मूल्य के दावों के तेजी से निपटारे के लिए एक नई त्वरित ट्रांसमिशन प्रोसेसिंग श्रेणी शुरू करने का निर्णय लिया है, जिससे कम दस्तावेजों में काम हो सकेगा। इसके तहत सरलीकृत दस्तावेज की सीमा बढ़ा दी गई है, कुछ मामलों में अनिवार्य पैन (PAN) जमा करने की शर्त हटा दी गई है, और सत्यापन को आसान बनाने के लिए क्यूआर (QR) कोड वाले मृत्यु प्रमाणपत्रों को स्वीकार करने की मंजूरी दी गई है।
सेबी ने चालू वर्ष में 1 अगस्त से स्टॉक एक्सचेंजों के माध्यम से ओपन-मार्केट शेयर बायबैक को फिर से शुरू करने की अनुमति दे दी है, जो संशोधित समय-सीमा और सख्त अनुपालन नियमों के तहत काम करेगा। इसके साथ ही, म्यूचुअल फंड को अस्थायी नकदी संकट से निपटने के लिए इंट्राडे उधारी लेने की सुविधा दी गई है। वैकल्पिक निवेश फंडों (AIF) को गरुड़ ढांचे के तहत तेजी से मंजूरी मिलेगी, जिससे उनके लॉन्च होने की समय-सीमा घटकर दस कार्यदिवस रह जाएगी।
इसके अतिरिक्त, सेबी ने आरबीआई (RBI) के ढांचे के अनुरूप प्रतिभूतिकृत ऋण उपकरणों के सुधारों और पुनर्वित्त के माध्यम से नगरपालिका बॉन्ड बाजार को मजबूत करने के उपायों को मंजूरी दी है। नियामक ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए एसएमई फ्रेमवर्क की समीक्षा को भी मंजूरी दी है। इसके साथ ही सेबी ने अपने सदस्यों और कर्मचारियों के लिए एक नई आचार संहिता अपनाई है, ताकि हितों के टकराव और प्रकटीकरण मानदंडों को अधिक मजबूत किया जा सके। सेबी के अनुसार, इन सुधारों का मुख्य उद्देश्य पारदर्शिता बढ़ाना, निवेशकों की सुविधा में सुधार करना और देश के पूंजी बाजार को मजबूती देना है।















