मुंबई, 20 जून।
इतिहास के झरोखे से आज का दिन कई सुनहरे अध्यायों को समेटे हुए है। 20 जून की तारीख देश की वाणिज्यिक राजधानी मुंबई के लिए एक युगांतकारी घटना की गवाह रही है, जब यहां का विश्वप्रसिद्ध रेलवे स्टेशन विक्टोरिया टर्मिनस पहली बार आम मुसाफिरों की सेवा के लिए समर्पित किया गया था।
साल 1877 में आज ही के दिन तत्कालीन बंबई के इस ऐतिहासिक स्टेशन के कपाट रेल यात्रियों के लिए खोले गए थे। अपनी नक्काशीदार भव्यता, बेजोड़ कलात्मकता और विशेष पहचान के चलते यह इमारत आज भी भारत के सबसे सुंदर और प्रतिष्ठित रेलवे परिसरों में शीर्ष स्थान रखती है।
स्थापत्य कला की बात करें तो इस स्टेशन को विक्टोरियन गोथिक शैली और पारंपरिक भारतीय वास्तुकला के अद्भुत मिश्रण से तैयार किया गया है। इसकी गगनचुंबी संरचना, कलात्मक गुंबद, खूबसूरत मेहराबें और पत्थरों पर उकेरी गई बारीक नक्काशी इसे देश की अमूल्य स्थापत्य धरोहर बनाती है।
ब्रिटेन की महारानी विक्टोरिया के आदर में प्रारंभ में इसका नाम विक्टोरिया टर्मिनस रखा गया था। इसके बाद वर्ष 1996 में इसका नामकरण छत्रपति शिवाजी टर्मिनस किया गया, जिसे बाद में छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस के रूप में विस्तार मिला। स्थानीय लोग आज भी इसे पुराने संक्षिप्त नाम 'वी.टी.' से याद करते हैं।
इस स्टेशन के बेमिसाल सांस्कृतिक और ऐतिहासिक मूल्य को पहचानते हुए यूनेस्को ने वर्ष 2004 में इसे विश्व धरोहर स्थल की प्रतिष्ठित सूची में शामिल किया था। यह गौरवशाली तमगा भारतीय रेल और देश की वास्तुकला की वैश्विक साख को मजबूती प्रदान करता है।
वर्तमान समय में यह भव्य परिसर सिर्फ एक स्टेशन मात्र नहीं है, बल्कि मायानगरी मुंबई की जीवंत पहचान और देश के सबसे गतिशील परिवहन केंद्रों में शुमार है। 20 जून 1877 से शुरू हुआ इसका सफर आज भी अनवरत जारी है।















