नई दिल्ली, 22 जून।
देश में अंगदान अभियान को बड़ी सफलता मिली है। अब तक 5 लाख से अधिक लोगों ने अंगदान प्रतिज्ञा लेकर जीवन बचाने के इस मानवीय अभियान से जुड़ने की इच्छा जताई है। यह उपलब्धि देश में अंग एवं ऊतक दान के प्रति बढ़ती जागरूकता और नागरिकों की सक्रिय भागीदारी को दर्शाती है।
स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार अंगदान को अब समाज में व्यापक स्वीकार्यता मिल रही है। लोगों के बीच यह समझ विकसित हुई है कि अंगदान के माध्यम से प्रत्यारोपण की प्रतीक्षा कर रहे मरीजों को नया जीवन दिया जा सकता है। मंत्रालय का मानना है कि यह उपलब्धि स्वैच्छिक अंगदान को बढ़ावा देने के लिए किए गए लगातार प्रयासों का परिणाम है।
इस अवसर पर राष्ट्रीय अंग एवं ऊतक प्रत्यारोपण संगठन (एनओटीटीओ) के निदेशक डॉ. अनिल कुमार ने देशवासियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि सरकारी और गैर-सरकारी संस्थाओं, स्वास्थ्यकर्मियों, शैक्षणिक संस्थानों, मीडिया संगठनों और विभिन्न सहयोगी समूहों ने लोगों को अंगदान के लिए प्रेरित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
उन्होंने बताया कि अंगों और ऊतकों की बढ़ती मांग तथा उपलब्धता के बीच अंतर को कम करने के लिए लगातार जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं। साथ ही प्रत्यारोपण व्यवस्था को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और मरीज-केंद्रित बनाने की दिशा में भी काम किया जा रहा है।
डॉ. अनिल कुमार ने कहा कि हाल के वर्षों में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा विभिन्न मंचों, विशेष रूप से ‘मन की बात’ कार्यक्रम में अंगदान के महत्व पर दिए गए संदेशों से भी इस अभियान को नई गति मिली है। इससे समाज में सकारात्मक सोच विकसित हुई और अधिक लोग इस पहल से जुड़ने के लिए प्रेरित हुए।
अंगदान की प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए आधार आधारित ऑनलाइन पंजीकरण व्यवस्था भी शुरू की गई है। इसके माध्यम से नागरिक आसानी और सुरक्षित तरीके से अपनी अंगदान प्रतिज्ञा दर्ज कर सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ती जागरूकता आने वाले समय में हजारों मरीजों के लिए नई उम्मीद बन सकती है।















