मुंबई, 22 जून।
महाराष्ट्र सरकार ने मानसून सत्र के पहले दिन विधानसभा में 97,706.40 करोड़ रुपये की अनुपूरक मांगें पेश कीं। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सदन में यह प्रस्ताव रखते हुए विभिन्न विकास योजनाओं, कृषि, ऊर्जा, सामाजिक कल्याण और आधारभूत ढांचे से जुड़े खर्चों के लिए अतिरिक्त वित्तीय प्रावधानों की जानकारी दी। समायोजन और वसूली के बाद राज्य के खजाने पर करीब 74,817.66 करोड़ रुपये का वास्तविक अतिरिक्त भार पड़ने का अनुमान है।
अनुपूरक मांगों में सबसे बड़ा प्रावधान कृषि ऋण माफी योजना के लिए किया गया है, जिसके तहत 20,552 करोड़ रुपये प्रस्तावित हैं। इसके अलावा विभिन्न कार्यक्रमों और योजनाओं के संचालन के लिए 66,559.40 करोड़ रुपये तथा अपरिहार्य व्यय के लिए 13,825.71 करोड़ रुपये की मांग रखी गई है। केंद्र प्रायोजित योजनाओं के लिए भी 17,321.29 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
सरकार ने महाराष्ट्र राज्य विद्युत वितरण कंपनी के ऋण और ब्याज भुगतान के लिए 8 हजार करोड़ रुपये निर्धारित किए हैं। वहीं विकसित भारत–रोजगार व आजीविका मिशन (ग्रामीण) के लिए 7,367.32 करोड़ रुपये का प्रस्ताव रखा गया है। सरकारी कार्यालयों के बिजली बिल भुगतान के लिए एकीकृत बिलिंग प्रणाली के तहत 4 हजार करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं।
शहरी विकास और आधारभूत संरचना को मजबूत करने के लिए अमृत 2.0 मिशन हेतु 3,076 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा नासिक सिंहस्थ कुंभ की तैयारियों के लिए 3 हजार करोड़ रुपये रखे गए हैं। कृषि पंपों, पावरलूम, वस्त्र और औद्योगिक उपभोक्ताओं के लिए बिजली दर अनुदान पर 2,722.42 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।
शिक्षा और सामाजिक कल्याण से जुड़ी योजनाओं के लिए भी महत्वपूर्ण प्रावधान किए गए हैं। छात्रवृत्ति योजनाओं के लिए 2,360.06 करोड़ रुपये, श्रवणबाल सेवा राज्य पेंशन योजना के लिए 2 हजार करोड़ रुपये तथा संजय गांधी निराधार योजना के लाभार्थियों के लिए 1,874.38 करोड़ रुपये की मांग रखी गई है। आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के मानदेय और वेतन के लिए 1,734.92 करोड़ रुपये का प्रस्ताव भी शामिल है।
विभागवार आवंटन में सहकारिता, विपणन एवं वस्त्र विभाग को 22,015.42 करोड़ रुपये, नगर विकास विभाग को 15,152.43 करोड़ रुपये और उद्योग, ऊर्जा, श्रम एवं खनन विभाग को 14,760.48 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा वित्त, योजना, लोक निर्माण, सामाजिक न्याय और स्वास्थ्य विभागों के लिए भी अतिरिक्त राशि प्रस्तावित की गई है।
सरकार का कहना है कि इन प्रावधानों का उद्देश्य विकास परियोजनाओं को गति देना, सामाजिक सुरक्षा योजनाओं को मजबूत करना और राज्य में आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देना है।















