नई दिल्ली, 22 जून।
दिल्ली पुलिस की साइबर थाना टीम ने ऑनलाइन ठगी से जुड़े एक बड़े अंतरराज्यीय गिरोह का खुलासा करते हुए चार आरोपितों को गिरफ्तार किया है। यह गिरोह देशभर के साइबर अपराधियों को म्यूल अकाउंट और पीओएस मशीनें उपलब्ध कराकर ठगी की रकम को वैध लेनदेन के रूप में दिखाने का काम करता था। कार्रवाई के दौरान पुलिस ने कई बैंकिंग दस्तावेज, डेबिट कार्ड, पीओएस टर्मिनल और अन्य डिजिटल साक्ष्य बरामद किए हैं।
पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपित निवेश के नाम पर ठगी, फर्जी नौकरी दिलाने के झांसे और डिजिटल अरेस्ट जैसे साइबर अपराधों से प्राप्त धनराशि को अलग-अलग खातों के जरिए घुमाकर वैध कारोबारी लेनदेन का स्वरूप देते थे। इसके लिए विशेष रूप से तैयार किए गए बैंक खातों और व्यावसायिक व्यवस्थाओं का उपयोग किया जाता था।
सूचना मिलने के बाद मध्य जिला पुलिस की साइबर टीम ने पहाड़गंज स्थित एक होटल में छापेमारी की। इस दौरान चार लोगों को गिरफ्तार किया गया। मामले में भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज कर आगे की जांच शुरू कर दी गई है।
जांच के दौरान पता चला कि गिरोह का नेटवर्क कई राज्यों तक फैला हुआ था। इसके सदस्य कमीशन लेकर लोगों के नाम पर बैंक खाते खुलवाते थे और फर्जी कंपनियां तैयार कर उनके नाम से करंट अकाउंट संचालित करते थे। इन खातों में साइबर ठगी से हासिल रकम जमा कर पीओएस मशीनों और मर्चेंट यूपीआई क्यूआर कोड के माध्यम से उसे वैध व्यापारिक लेनदेन दर्शाया जाता था।
पुलिस के अनुसार, खाते उपलब्ध कराने वालों को लगभग आठ प्रतिशत तक कमीशन दिया जाता था, जबकि मध्यस्थ एजेंटों को दो से चार प्रतिशत हिस्सा मिलता था। जांच में एसजी एंटरप्राइजेज, जीएम एंटरप्राइजेज और एचएम ट्रेडर्स जैसी फर्मों के नाम पर संचालित खातों की जानकारी भी सामने आई है।
तकनीकी पड़ताल में बरामद बैंक खातों का संबंध राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर दर्ज कई शिकायतों से मिला है। विभिन्न राज्यों में दर्ज साइबर ठगी के मामलों में इन खातों के इस्तेमाल के संकेत मिले हैं। पुलिस ने आरोपितों के कब्जे से सक्रिय पीओएस टर्मिनल, मर्चेंट यूपीआई स्कैनर, चेक बुक, पासबुक, डेबिट कार्ड, साझेदारी दस्तावेज, रबर स्टांप, किरायानामा और मोबाइल फोन समेत कई महत्वपूर्ण सामग्री जब्त की है। मामले में आगे की जांच जारी है।















