भोपाल, 22 जून।
मध्य प्रदेश में मछली पालन क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने बड़े स्तर पर योजनाएं तैयार की हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने निर्देश दिए हैं कि प्रदेश के प्रत्येक जिले में एक हैचरी विकसित की जाए, ताकि मछली बीज की स्थानीय उपलब्धता बढ़े और उत्पादन क्षमता में विस्तार हो सके। उन्होंने कहा कि राज्य को मछली बीज उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने के लिए विभाग को तय समयसीमा के साथ कार्य करना होगा।
सोमवार को मंत्रालय में आयोजित मछुआ कल्याण एवं मत्स्य विकास विभाग की समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने बताया कि एकीकृत मत्स्योद्योग नीति 2026 के तहत प्रदेश में 9 हजार करोड़ रुपये से अधिक का निवेश आकर्षित हो रहा है। उन्होंने जानकारी दी कि 2 लाख 91 हजार 938 केज प्रस्तावों के लिए कार्यादेश जारी किए जा चुके हैं, जिससे मत्स्य क्षेत्र में नई संभावनाएं विकसित होंगी।
मुख्यमंत्री ने मोती उत्पादन को भी प्रोत्साहित करने पर जोर देते हुए कहा कि अन्य राज्यों की सफल कार्यप्रणालियों का अध्ययन कर उन्हें मध्य प्रदेश में लागू किया जाए। उन्होंने कहा कि अगले ढाई वर्षों में प्रदेश को इस स्थिति में लाना होगा कि मछली बीज के लिए बाहरी राज्यों पर निर्भरता समाप्त हो जाए।
डॉ. यादव ने बढ़ते मछली उत्पादन को देखते हुए कोल्ड चेन, भंडारण और अन्य आवश्यक आधारभूत सुविधाओं के विकास के निर्देश दिए। साथ ही उत्पादों की ब्रांडिंग और निर्यात को बढ़ावा देने के लिए प्रभावी नेटवर्क तैयार करने की आवश्यकता भी बताई।
उन्होंने कहा कि नदियों के संरक्षण, जलीय जीवों की सुरक्षा और जलीय पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत बनाने के लिए सभी विभागों को समन्वय के साथ कार्य करना चाहिए। जल संसाधनों पर आधारित पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए भी व्यापक कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए गए।
बैठक में यह भी बताया गया कि मछुआ किसान क्रेडिट कार्ड योजना के तहत अंतर्देशीय जल क्षेत्र में मध्य प्रदेश देश में दूसरे स्थान पर है। वहीं राष्ट्रीय स्तर पर अंतर्देशीय मत्स्य पालन श्रेणी में वर्ष 2023-24 के लिए सिवनी जिला प्रथम स्थान हासिल कर चुका है।
समीक्षा बैठक में मत्स्य विकास राज्य मंत्री नारायण सिंह पवार, मुख्य सचिव अनुराग जैन, विभागीय सचिव स्वतंत्र कुमार सिंह और अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।















