काठमांडू, 24 जून।
नेपाल और चीन के बीच पहली अंतरदेशीय विद्युत प्रसारण लाइन के निर्माण की राह अब साफ होती दिख रही है। नेपाल सरकार ने ‘चिलिमे–केरुङ–जिलोङ 220 केवी प्रसारण लाइन’ को आगे बढ़ाने के लिए चीन को औपचारिक सहमति पत्र भेजने का निर्णय लिया है। यह कदम दोनों देशों के बीच ऊर्जा सहयोग में एक बड़ा बदलाव ला सकता है।
अभी तक नेपाल का बिजली व्यापार मुख्य रूप से भारत पर केंद्रित रहा है। ऐसे में चीन के साथ यह सीधी लाइन जुड़ना नेपाल के ऊर्जा क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि साबित होगी। यह परियोजना रणनीतिक रूप से दोनों देशों के लिए काफी अहम मानी जा रही है।
प्रस्तावित प्रसारण लाइन की कुल लंबाई करीब 120 किलोमीटर होगी। इसमें से 94 किलोमीटर का हिस्सा चीन के तिब्बत स्थित जिलोङ से और शेष 26 किलोमीटर का हिस्सा नेपाल की सीमा में रसुवागढ़ी से चिलिमे तक बनेगा। रसुवा का चिलिमे हब इस पूरी योजना का मुख्य केंद्र बिंदु होगा।
परियोजना प्रमुख के अनुसार, दोनों देशों के बीच अब अंतिम कार्यान्वयन समझौते को लेकर चर्चाएं अंतिम दौर में हैं। पहले यह तय था कि दोनों देश अपने-अपने क्षेत्र में निर्माण खुद करेंगे, लेकिन चीन द्वारा नेपाल वाले हिस्से को भी अनुदान में बनाने का प्रस्ताव दिए जाने से कार्यप्रणाली में बदलाव किया गया है।
इस महत्वाकांक्षी परियोजना की नींव 2017 से रखी गई थी। बाद में 2025 में प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली की चीन यात्रा के दौरान इसे बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (बीआरआई) के ढांचे में शामिल किया गया। बीआरआई के तहत यह नेपाल की पहली ऐसी ठोस बुनियादी ढांचा परियोजना बन गई है, जिसे तेजी से धरातल पर उतारने की तैयारी है।









