भोपाल, 29 जून।
मध्य प्रदेश में डिजिटल पुलिसिंग और आपराधिक न्याय प्रणाली को अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से कुशाभाऊ ठाकरे सभागार (मिंटो हॉल) में राज्य स्तरीय आईसीजेएस कार्यशाला आयोजित की गई। राज्य अपराध अभिलेख ब्यूरो (एससीआरबी) और पुलिस मुख्यालय के संयुक्त आयोजन में पुलिस, न्यायपालिका, अभियोजन, जेल, फॉरेंसिक तथा स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारी पहली बार एक साझा मंच पर एकत्र हुए। कार्यशाला में इंटरऑपरेबल क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम (आईसीजेएस) के प्रभावी क्रियान्वयन और डिजिटल समन्वय को मजबूत करने पर विस्तार से चर्चा हुई।
कार्यक्रम का शुभारंभ मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति संजीव एस. कालगांवकर, पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाणा, अपर मुख्य सचिव (गृह) संजय शुक्ला, अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (एससीआरबी) जयदीप प्रसाद तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ।
मुख्य अतिथि न्यायमूर्ति कालगांवकर ने कहा कि आईसीजेएस केवल एक तकनीकी मंच नहीं, बल्कि पुलिस, न्यायालय, अभियोजन, फॉरेंसिक और अन्य एजेंसियों के बीच प्रभावी समन्वय स्थापित करने की मजबूत व्यवस्था है। उन्होंने नए आपराधिक कानूनों में डिजिटल तकनीक, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के सुरक्षित प्रबंधन, ई-समन, ई-वारंट, डिजिटल चार्जशीट और कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित न्याय प्रणाली के महत्व पर विशेष जोर दिया।
पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाणा ने कहा कि साइबर अपराध, संगठित अपराध और वित्तीय धोखाधड़ी जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए तकनीक आधारित पुलिसिंग आवश्यक है। उन्होंने बताया कि मध्य प्रदेश पुलिस सीसीटीएनएस, ई-साक्ष्य और एनएएफआईएस जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से विवेचना को अधिक वैज्ञानिक, पारदर्शी और समयबद्ध बना रही है।
अपर मुख्य सचिव (गृह) संजय शुक्ला ने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल रैंकिंग में सुधार करना नहीं, बल्कि नागरिकों को त्वरित और पारदर्शी न्याय उपलब्ध कराना है। इसके लिए विभिन्न विभागों के बीच डिजिटल इंटीग्रेशन को लगातार मजबूत किया जा रहा है।
तकनीकी सत्र में एनसीआरबी, नई दिल्ली के उपनिदेशक प्रसून गुप्ता सहित विशेषज्ञों ने आईसीजेएस 2.0, डिजिटल फॉरेंसिक, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और पेपरलेस डेटा शेयरिंग जैसे विषयों पर प्रस्तुति दी। वहीं इंदौर कमिश्नरेट, देवास और रतलाम पुलिस की टीमों ने डिजिटल इंटीग्रेशन से जुड़े अपने सफल मॉडल और नवाचार साझा किए।
कार्यशाला के दौरान जून 2025 से मई 2026 की अवधि में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले जिलों और इकाइयों को सम्मानित किया गया। सीसीटीएनएस डेटा गुणवत्ता श्रेणी में रतलाम पहले, अशोकनगर और गुना संयुक्त रूप से दूसरे तथा राजगढ़ तीसरे स्थान पर रहे।
भोपाल पुलिस कमिश्नरेट की फिंगरप्रिंट शाखा को फिंगरप्रिंट प्रबंधन एवं पहचान के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य के लिए प्रदेश का एक्सीलेंस अवॉर्ड प्रदान किया गया। पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाणा ने शाखा की टीम को सम्मानित किया। इस श्रेणी में देवास और इंदौर को भी सम्मान मिला। भोपाल पुलिस आयुक्त संजय कुमार ने इसे वैज्ञानिक अनुसंधान और आधुनिक पुलिसिंग की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।
कार्यशाला के समापन पर विभिन्न विभागों से प्राप्त सुझावों के आधार पर आईसीजेएस रोडमैप 2026-27 तैयार करने पर सहमति बनी। अधिकारियों ने विश्वास व्यक्त किया कि पुलिस, न्यायपालिका और अन्य एजेंसियों के बीच मजबूत डिजिटल समन्वय से प्रदेश की आपराधिक न्याय व्यवस्था अधिक पारदर्शी, त्वरित और नागरिक-केंद्रित बनेगी।

















