भोपाल, 30 जून।
ओडिशा के पंचायती राज एवं पेयजल मंत्री रबी नारायण नायक के नेतृत्व में आए उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने मंगलवार को मध्य प्रदेश जल निगम की कार्यप्रणाली का अध्ययन किया। इस दौरान प्रतिनिधिमंडल ने ग्रामीण जलापूर्ति, तकनीक आधारित मॉनिटरिंग, संचालन एवं संधारण, वित्तीय प्रबंधन और मानव संसाधन विकास से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जानकारी प्राप्त की।
अध्ययन के दौरान रबी नारायण नायक ने मध्य प्रदेश जल निगम की नवाचार आधारित कार्यप्रणाली की सराहना करते हुए कहा कि यहां अपनाई गई कई व्यवस्थाओं को ओडिशा में भी लागू करने का प्रयास किया जाएगा। निगम के प्रबंध संचालक के.वी.एस. चौधरी ने प्रतिनिधिमंडल को जल जीवन मिशन के तहत संचालित ग्रामीण नल-जल योजनाओं, डिजिटल मॉनिटरिंग, रियल टाइम निगरानी प्रणाली, संचालन एवं संधारण मॉडल, ग्रामीण क्षेत्रों में जल उपयोग और विद्युत भुगतान व्यवस्था, प्रशिक्षण कार्यक्रमों तथा तकनीक आधारित प्रबंधन प्रणाली की विस्तृत जानकारी दी।
बैठक में मध्य प्रदेश जल निगम के संस्थागत ढांचे, सुशासन, वित्तीय मॉडल, परियोजना क्रियान्वयन तथा 'जल रेखा' और 'पंचायत दर्पण' जैसे तकनीकी नवाचारों पर भी विस्तार से चर्चा हुई। प्रतिनिधिमंडल ने इन व्यवस्थाओं को ग्रामीण पेयजल सेवाओं के प्रभावी संचालन के लिए उपयोगी बताते हुए इनके व्यावहारिक पक्षों की जानकारी भी हासिल की।
दोनों राज्यों के अधिकारियों के बीच संस्थागत ढांचे, वित्तीय स्वायत्तता, गुणवत्ता नियंत्रण, डिजिटल गवर्नेंस, परियोजना क्रियान्वयन और भविष्य में आपसी सहयोग की संभावनाओं पर भी विचार-विमर्श हुआ। रबी नारायण नायक ने कहा कि मध्य प्रदेश जल निगम ने पेशेवर और परिणाम आधारित कार्यप्रणाली विकसित की है, जो अन्य राज्यों के लिए भी प्रेरणादायी मॉडल साबित हो सकती है। उन्होंने कहा कि इस अध्ययन भ्रमण से प्राप्त अनुभव ओडिशा की ग्रामीण पेयजल व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने में सहायक होंगे।
ओडिशा के प्रतिनिधिमंडल में पंचायती राज एवं पेयजल विभाग के आयुक्त-सह-सचिव गिरीश एस.एन., पेयजल एवं स्वच्छता निदेशक विनीत भारद्वाज, अतिरिक्त सचिव मधुस्मिता सामल, इंजीनियर-इन-चीफ रत्नाकर सियाल सहित विभाग और स्टेट पीएमयू के वरिष्ठ अधिकारी शामिल रहे। बैठक में मध्य प्रदेश जल निगम के वरिष्ठ अधिकारियों ने विभिन्न विषयों पर विस्तृत प्रस्तुति दी।















